धर्मशाला, 7 जुलाई। कारगिल युद्ध के परमवीर चक्र विजेता शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा की वीरता और बलिदान की कहानी को वर्ष 2021 में फिल्म Shershaah के माध्यम से बड़े पर्दे पर जीवंत किया गया। फिल्म ने न केवल युद्ध के मैदान में एक सैनिक के अदम्य साहस को दिखाया, बल्कि उसके सपनों, परिवार, प्रेम और राष्ट्र के प्रति समर्पण को भी बेहद संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया। यही वजह है कि रिलीज़ के कई वर्षों बाद भी यह फिल्म दर्शकों के बीच उतनी ही लोकप्रिय है।
फिल्म का निर्देशन Vishnuvardhan ने किया, जबकि निर्माण Karan Johar के धर्मा प्रोडक्शंस ने किया। इसमें Sidharth Malhotra ने कैप्टन विक्रम बत्रा और Kiara Advani ने डिंपल चीमा की भूमिका निभाई। दोनों कलाकारों के अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों ने खूब सराहा।
फिल्म की कहानी कैप्टन विक्रम बत्रा के बचपन से शुरू होकर भारतीय सेना में उनके चयन, कारगिल युद्ध के दौरान पॉइंट 5140 और पॉइंट 4875 जैसी रणनीतिक चोटियों पर विजय तथा मातृभूमि के लिए उनके सर्वोच्च बलिदान तक पहुंचती है। युद्ध के दृश्यों को वास्तविकता के करीब दिखाने का प्रयास फिल्म की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक माना गया।
फिल्म का भावनात्मक पक्ष कैप्टन विक्रम बत्रा और डिंपल चीमा की प्रेम कहानी है। दोनों के रिश्ते, भविष्य के सपने और फिर युद्ध के कारण आए दर्दनाक मोड़ को बेहद सादगी और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया। यही पहलू दर्शकों को सबसे अधिक भावुक करता है।
फिल्म में कैप्टन विक्रम बत्रा का प्रसिद्ध संवाद "ये दिल मांगे मोर" भी प्रमुखता से शामिल किया गया है। कारगिल युद्ध के दौरान यह वाक्य उनकी जीत और अदम्य आत्मविश्वास का प्रतीक बन गया था और आज भी भारतीय सेना की वीरता के सबसे यादगार नारों में गिना जाता है।
'रातां लंबियां', 'रांझा' और 'मन भरया 2.0' जैसे गीतों ने फिल्म की भावनात्मक गहराई को और बढ़ाया। खासकर 'रांझा' आज भी कैप्टन विक्रम बत्रा और डिंपल चीमा की प्रेम कहानी से जुड़ा सबसे लोकप्रिय गीत माना जाता है।
रिलीज़ के बाद 'शेरशाह' को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सराहना मिली। फिल्म ने अनेक पुरस्कार अपने नाम किए और इसे हाल के वर्षों की सर्वश्रेष्ठ युद्ध-आधारित बायोपिक फिल्मों में शामिल किया गया।
कैप्टन विक्रम बत्रा के शहीदी दिवस पर 'शेरशाह' केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि उस वीर सपूत को सिनेमाई श्रद्धांजलि के रूप में देखी जाती है, जिसने अपने अंतिम क्षण तक देश की रक्षा को सर्वोपरि रखा। यह फिल्म नई पीढ़ी को यह संदेश देती है कि सच्ची वीरता केवल युद्ध जीतने में नहीं, बल्कि अपने कर्तव्य के लिए सब कुछ न्योछावर कर देने में होती है।