इससे पहले 6 जुलाई को दलाई लामा का 91वां जन्मदिवस लेह में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। समारोह में भारत, नेपाल और अन्य देशों से आए हजारों श्रद्धालुओं, बौद्ध भिक्षुओं तथा अनुयायियों ने उनकी दीर्घायु और विश्व शांति के लिए प्रार्थना की।
दलाई लामा ने कहा कि करुणा, दया और मानवता का प्रसार आज भी उनके जीवन का सबसे बड़ा मिशन है। उनका मानना है कि यदि दुनिया भर के लोग एक-दूसरे के प्रति सच्ची संवेदना और गर्मजोशी का भाव रखें, तो दुनिया सभी के लिए एक बेहतर स्थान बन सकती है।
लगभग नौ दशकों से अधिक समय से दलाई लामा शांति, करुणा, सहिष्णुता और मानवीय मूल्यों के संदेशवाहक बने हुए हैं। बदलते वैश्विक परिदृश्य में भी उनका संदेश यही है कि सच्ची खुशी बाहरी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि करुणा, संतोष और मानवता की सेवा से मिलती है।
6 जुलाई का दिन इतिहास के पन्नों में कई महत्वपूर्ण घटनाओं, जन्मों और पुण्यतिथियों के लिए दर्ज है। आइए जानते हैं 6 जुलाई को इतिहास में क्या-क्या खास हुआ।
धर्मशाला में रहने वाला तिब्बती समुदाय आज भी अपनी परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। यहाँ के मठों में भिक्षु और भिक्षुणियां बौद्ध धर्म की शिक्षा और साधना में लगे रहते हैं।