ममता का खड़गे का नाम प्रधान मंत्री के लिए propose करना और केजरीवाल का समर्थन करना कोई अनायास ही नही था , कहें तो उनकी अपेक्षा थी य़ा तो बैठक ही अस्त व्यस्त हो जाये अन्यथा केजरीवाल को संयोजक मान लिया जाये परंतु खड़गे ने इसी बात को ही पलट दिया यह कह कर अभी इसकी ज़रूरत नही पहले चुनौती 2024 पर काम करना होगा तो स्वत ही अब नाम तो आ गया खड़गे का , शेष फिर मीटिंग का यही लब्बो लुआब l
कांग्रेस ने अपनी राष्ट्रीय चुनाव समिति का गठन कर लिया हैं शायद अध्यक्ष अशोक गहलोत ही हों , 22 दिसम्बर को कांग्रेस की बैठक भी और 28 दिसम्बर को कांग्रेस का चुनावी वृतांत का खुलासा ऐसा संभव l कांग्रेस ने बड़ी तेजी से हार का आंकलन भी कर लिया, यह कहना गलत हैं कि कांग्रेस हारी हैं हिन्दी पट्टी में क्योंकि उसका वोट शेयर बढ़ा हैं कम नही हुआ, मध्य प्रदेश ही हैं जहां उसका वोट गिरा नही भाजपा का 6 फीसद बढ़ा हैं , गहलोत ने खुद ही मान लिया कि फिरकापरस्ती कारण बना , यह तो चार बाबाओं का जब भाजपा ने दाव चला तो जो गहलोत ने बताया वह माकूल लगता हैं हालांकि यदि कांग्रेस इन बाबाओं के खिलाफ खास तौर पर तिजारा में सिख को खड़ा कर देती तो पूरे प्रदेश ही नही मध्य प्रदेश में भी असर पढ़ता , यह तो कांग्रेस को सोचना था , सोनिया गाँधी के केवल एक कदम ने मन मोहन सिंघ को 2004 में मात्र 145 से 2009 में 206 किया था
क्योंकि सिख और मुस्लिम का विश्वास कांग्रेस में बढ़ा , यह बात शायद कांग्रेस समझ ही नही पायी , RSS ने बढ़े करीने से केजरीवाल को बढ़ा पहले दिल्ली से कांग्रेस को बाहर फिर पंजाब से अब उसका पूरा जोर हैं देश की राजनीति से ही कांग्रेस को अछूत बना दिया जाये , परंतु खड़गे के एक शब्द ने ही चाल को पलट दिया और चर्चा ही खत्म, यह कांग्रेस के लिए यह वक्त मुफीद साबित होगा यदि कांग्रेस इस बात को ध्यान में रखे जो आना चाहे उसका गुण दोष पर स्वागत हैं क्योंकि मुस्लिम कांग्रेस की ओर देख रहा हैं आज मैँ मेवात पर एक चर्चा में था जिसमें हरियाना, राजस्थान, दिल्ली, उत्राखण्ड , मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के नुमायेंदे शामिल थे लब्बो लुआब कांग्रेस के बिना वे वोट को बिखरने नही देना चाहता तो कांग्रेस को ही सोचना हैं ?
कांग्रेस को यह भी समझना होगा यदि वह पंजाब और दिल्ली में अपना हाथ खिसकाती हैं तो पंजाब में सिख नये राजनीतिक मंच खड़ा करने जा रहे हैं क्योंकि aap कोई विकल्प नही हैं और यही हालात दिल्ली की भी रहेगी क्योंकि वे केजरीवाल को संघी ही मानते हैं l
यह भी आशंका हैं कि जिस प्रकार 141 सांसदों को निलम्बित कर दिया गया हैं उससे लगता हैं कि चुनाव ही मार्च 2024 के अंत तक ही सम्पनं हो ने संभावना से इंकार नही किया जा सकता
दया सिंघ
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