दरअसल प्रशांत किशोर की क्लाइंट वाली सारी पार्टियाँ कांग्रेस को कमजोर करने या खुद को कांग्रेस का विकल्प दिखाने के लिए प्रदेशों में हाथ पैर-मार रही थी. और उनके खुद के कुकर्म इतने थे कि अगर भाजपा का आमने-सामने विरोध करतीं तो उनकी पार्टी तिहाड़ से चल रही होती.
उधर राहुल गांधी ने 'भारत जोड़ो यात्रा' सफलतापूर्वक संपन्न करके यह स्थापित कर दिया कि पूरे देश में वही एकमात्र ऐसे निडर नेता हैं, जो किसी भी तरह की चुनौती से किसी भी स्तर पर सड़क पर निपटने में सक्षम हैं... कर्नाटक के चुनाव हुए और कांग्रेस ने प्रॉक्सी विपक्ष का रोल अदा कर रही जेडीएस को समेट कर रख दिया (और वही जेडीएस अब लोकसभा में बीजेपी के साथ गठबंधन करने के लिए हाथ-पैर मार रही है)... कर्नाटक चुनाव के बाद बेचैनी बढ़ी और कई सारे नेता और पार्टियाँ, जिनकी दुकान उठने के कगार पर थी, वह गठबंधन के नाम पर कांग्रेस के साथ आने के लिए हाथ पर मारने लगीं.
जैसे ही एलाइंस बना, इन नेताओं का दबाव पड़ना शुरू हुआ कि सीटों का बंटवारा करना निश्चित कर लिया जाए. नीतीश कुमार, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, शरद पवार, केजरीवाल- यह सारे ऐसे नेता हैं, जो हमेशा से सुविधा की राजनीति करते हैं और दो नाव पर रखकर चलने के आदी हैं और इनमें से कोई भी नेता अपने दम पर सड़क पर लड़ने में सक्षम भी नहीं है....
घोसी उपचुनाव में कांग्रेस ने समर्थन दिया वह इसलिए क्योंकि कांग्रेस यूपी चुनाव में बीजेपी को पटकनी देने के पक्ष में थी... अब इस समर्थन का मजेदार पहलू यह निकला कि समाजवादी पार्टी मध्यप्रदेश में कांग्रेस से पांच विधानसभा सीट मांगने लगी और आम आदमी पार्टी ने मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में अपने प्रत्याशी भी घोषित कर दिए...
इस पूरे प्रकरण में सबसे मजेदार बात यह रही कि कुछ कलाकारों ने मध्यप्रदेश में इंडिया गठबंधन की एक रैली का मसौदा भी तैयार कर लिया. मैं पर्सनली यह भी जानना चाहता हूं कि कांग्रेस के वो कौन से नेता हैं, जिन्होंने मध्यप्रदेश में इंडिया गठबंधन की रैली का सुझाव दिया था?
यकीनन वह कांग्रेस के शुभचिंतक या वफादार तो बिल्कुल भी नहीं है... मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में कांग्रेस और सत्ताधारी पार्टी की सीधी लड़ाई है और इन राज्यों में इंडिया गठबंधन की जो भी पार्टियाँ चुनाव लड़ने के लिए प्रत्याशी घोषित कर रही हैं, वो बीजेपी को हराने के लिए नहीं, बल्कि कांग्रेस की कीमत पर खुद को मजबूत करने के एजेंट के तौर पर काम कर रही हैं....
सुकून की बात है कि मध्यप्रदेश की इंडिया गठबंधन की रैली निरस्त कर दी गई पर अंतिम रूप से कह रहा हूं कि राज्यों के चुनाव तक न तो किसी प्रदेश में इंडिया गठबंधन की कोई रैली होनी चाहिए और न ही लोकसभा की सीटों के बंटवारे या तालमेल पर कोई बात होनी चाहिए और सभी सीटों पर अपने दम पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी होनी चाहिए...
और हां 'भारत जोड़ो यात्रा 2' में राहुल के आसपास गठबंधन का कोई भी नेता बिल्कुल भी नहीं दिखना चाहिए क्योंकि राहुल की मेहनत पर सिर्फ राहुल का हक है कांग्रेस का हक़ है!
Ramkrishna Mishra (डॉ रामकृष्ण मिश्र)