शायद भारत के इतिहास में यह पहली बार हुआ होगा कि किसी उद्योग प्रबन्धन ने बिना स्थानीय सरकार व प्रशासन को बताए इतने बडे़ उद्योग, जिन में हजा़रों लोग काम करते हैं व हजारों ट्र्क जिस में संलिप्त हों ,अचानक बन्द कर दिए गए। यह कोई सामान्य घटना नहीं लगती बल्कि सोची समझी एक साजि़श लगती है जिस के पीछे प्रदेश में अराजकता का वातावरण तैयार करना भी हो सकता है।
यह भी सोचनीय है कि जिस राज्य में सिमेंट बनता है उस राज्य में सिमेंट की किमतें ज़्यादा व पडो़सी राज्यों में कम हैं। लेकिन किसी भी नेता की जूबान से यह शब्द नहीं फूटते कि यह क्यों ऐसा है ? इस बात से कोई इन्कार नहीं कर सकता कि हमारे नेता इन उद्योगपतियों के हाथों की कठपूतली बनें रहते हैं, क्योंकि इन के माध्यम से ही वे अपनी सियासत चमकाते हैं।
हिमाचल सरकार को बिलासपुर व दाड़लाघाट की इस घटना को सामान्य घटना न ले कर, एक सोची समझी चाल मानना चाहिए व इस के साथ सख्ती से पेश आना चाहिए। प्रदेश की जनता खास कर बिलासपुर ,सोलन ,हमीरपुर व मण्डी के ट्र्क मालिक इस बात के लिए सरकार के साथ खडे़ होंगे , ऐसा मेरा विश्वास है।
मेरा बिलासपुर की पोस्टिंग के दौरान इन दोनों सिमेंट उद्योगों की ढुलाई से उत्पन समस्या से काफी वास्ता रहा है। यह उद्योगपति प्रशासना को बहुत हल्के में लेते हैं जब तक इन्हे आयना न दिखाया जाए तब तक बात नहीं करते। भूत-पुर्व मुख्यमंत्री के ब्यान से भी झलकता है कि यह समस्या जानबूझ कर इस समय खडी़ की गई है जब अभी प्रदेश सरकार अपने पैरों पर खडी़ हो ही रही है। लेकिन जनता सब जानती है व समझती भी है कि इस घटना के पीछे कौन है व किस बज़ह से यह सर्जिकल स्ट्राईक की गई है ।B.R. Kaundal