9 नवंबर का इतिहास: देश और दुनिया में आज के दिन की प्रमुख घटनाएं
9 नवंबर का दिन भारतीय इतिहास में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए याद किया जाता है। इस दिन उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ था। इसके अलावा बर्लिन की दीवार गिरने, भारत के सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक अयोध्या फैसले और कई महान हस्तियों के जन्म एवं निधन के कारण भी यह तारीख इतिहास में विशेष महत्व रखती है।
9 नवंबर की प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं
- 1236: दिल्ली सल्तनत के शासक रुकनुद्दीन फिरोज शाह की हत्या कर दी गई।
- 1877: प्रसिद्ध उर्दू कवि, शायर और दार्शनिक डॉ. मोहम्मद इकबाल का जन्म सियालकोट में हुआ।
- 1922: अल्बर्ट आइंस्टाइन को वर्ष 1921 के भौतिकी के नोबेल पुरस्कार के लिए चुने जाने की घोषणा हुई।
- 1938: जर्मनी में यहूदियों के खिलाफ हिंसक हमले हुए। इस घटना को इतिहास में 'क्रिस्टलनाख्ट' यानी नाइट ऑफ ब्रोकन ग्लास के नाम से जाना जाता है।
- 1947: जूनागढ़ रियासत का प्रशासन भारत सरकार ने अपने नियंत्रण में लिया।
- 1985: गैरी कास्पारोव ने अनातोली कारपोव को हराकर विश्व शतरंज चैंपियन का खिताब जीता। उस समय उनकी उम्र महज 22 वर्ष थी।
- 1989: पूर्वी जर्मनी ने पश्चिमी जर्मनी की ओर जाने वाली अपनी सीमाएं खोल दीं। इसके साथ ही बर्लिन की दीवार के पतन की ऐतिहासिक शुरुआत हुई।
- 2000: उत्तर प्रदेश से अलग होकर उत्तरांचल भारत का 27वां राज्य बना। जनवरी 2007 में इसका नाम बदलकर उत्तराखंड कर दिया गया।
- 2019: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या भूमि विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया।
9 नवंबर को जन्मी प्रमुख हस्तियां
1877 – मोहम्मद इकबाल
महान उर्दू शायर, कवि और दार्शनिक।
1934 – कार्ल सागन
प्रसिद्ध अमेरिकी खगोलशास्त्री और विज्ञान लेखक।
1974 – एलेसांद्रो डेल पिएरो
इटली के प्रसिद्ध फुटबॉल खिलाड़ी।
9 नवंबर को हुआ प्रमुख निधन
- 1960: भारत के पहले एयर चीफ मार्शल सुब्रतो मुखर्जी का निधन।
- 1970: फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति और महान सैन्य नेता चार्ल्स डी गॉल का निधन।
- 2005: भारत के पूर्व राष्ट्रपति के. आर. नारायणन का निधन।
9 नवंबर के महत्वपूर्ण दिवस
1. उत्तराखंड स्थापना दिवस
2. राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस
3. कंबोडिया का स्वतंत्रता दिवस
9 नवंबर का विशेष महत्व
9 नवंबर भारत के लिए विशेष महत्व रखता है। इसी दिन उत्तराखंड राज्य की स्थापना हुई थी। वहीं विश्व इतिहास में 1989 में बर्लिन की दीवार खुलने की घटना ने शीत युद्ध के अंत और जर्मनी के पुनः एकीकरण का मार्ग प्रशस्त किया।
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