भूजल को अगली पीढ़ियों के लिए बचाना जरूरी; किसान ट्यूबवेल की बजाय नहर के पानी से करें सिंचाई: सीएम भगवंत सिंह मान
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अपने पैतृक गांव में लोगों से मिले सीएम, मांगों के जल्द समाधान का दिया भरोसा
संगरूर, 30 अप्रैल: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने गुरुवार को टिकाऊ कृषि और दीर्घकालिक जल संरक्षण के लिए व्यापक रोडमैप पेश करते हुए राज्य के किसानों से अपील की कि वे सिंचाई के लिए नहर आधारित प्रणाली अपनाएं और भूजल पर अत्यधिक निर्भरता कम करें।
अपने पैतृक गांव सतौज में ग्रामीणों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब का भविष्य उसके जल संसाधनों से जुड़ा है और इन्हें बचाना सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि आगामी धान सीजन के लिए 1 मई से ही नहरों में पानी उपलब्ध कराया जा रहा है, जो पारंपरिक व्यवस्था से बड़ा बदलाव है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “यह पंजाब के इतिहास में पहली बार है कि 1 मई से ही किसानों को नहर का पानी उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे उन्हें समय पर सिंचाई में मदद मिलेगी।”
उन्होंने बताया कि लगभग 21,000 क्यूसेक पानी पहले ही नहर नेटवर्क में छोड़ा जा चुका है, ताकि किसानों को शुरुआती सिंचाई में किसी तरह की दिक्कत न आए।
सीएम ने दोहराया कि पंजाब अपने पानी के अधिकारों को लेकर पूरी तरह सतर्क है और राज्य का पानी किसानों के हित में ही उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने भूजल के तेजी से गिरते स्तर पर चिंता जताते हुए कहा कि अब सोच बदलने का समय आ गया है।
उन्होंने कहा, “भूजल एक सीमित संसाधन है, जिसे हमें आने वाली पीढ़ियों के लिए बचाना होगा। नहर का पानी ही पंजाब की खेती का टिकाऊ भविष्य है।”
सरकार के प्रयासों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि मार्च 2026 से अब तक सिंचाई परियोजनाओं पर ₹6,700 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। इसके तहत करीब 14,000 किलोमीटर पाइपलाइन और वाटरकोर्स बिछाए गए हैं, जबकि धान सीजन से पहले 4,000 किलोमीटर अतिरिक्त वाटरकोर्स और 3,000 किलोमीटर पाइपलाइन शुरू हो जाएंगी।
उन्होंने कहा कि छोड़ा गया 21,000 क्यूसेक पानी इन प्रणालियों की जांच, खामियों की पहचान और सुधार में भी मदद करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नहरों में छोड़ा गया पानी दो भाखड़ा नहरों के बराबर है, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिलेगी और भूजल पर निर्भरता घटेगी। साथ ही, इससे भूजल रिचार्ज को भी बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने ग्रामीणों से भावनात्मक जुड़ाव व्यक्त करते हुए कहा, “यह मेरा गांव है, मेरे अपने लोग हैं। मैं सभी को जानता हूं, इसलिए यह दौरा मेरे लिए खास है।”
सीएम ने लोगों से अपील की कि वे ट्यूबवेल से अत्यधिक पानी निकालने से बचें और हर बूंद पानी को बचाएं। उन्होंने बताया कि नहरों के साथ हर 20 मीटर पर रिचार्ज पॉइंट बनाए गए हैं, जिससे भूजल स्तर को बढ़ाने में मदद मिलेगी।
विधायी पहल पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने “जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक, 2026” को ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत बेअदबी करने वालों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान है और दोषियों को उम्रकैद तक की सजा दी जाएगी।
उन्होंने कहा, “यह केवल धार्मिक अपराध नहीं बल्कि मानवता के खिलाफ अपराध है, जो समाज में शांति और सद्भाव बिगाड़ने के लिए किया जाता है।”
एक अन्य महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि कृषि क्षेत्रों से गुजरने वाली हाई-टेंशन बिजली लाइनों को भूमिगत करने का निर्णय लिया गया है। यह परियोजना पायलट आधार पर उनके पैतृक गांव से शुरू होगी, जिसमें लगभग 413 ट्यूबवेल और 1,100 बिजली पोल शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि इससे जान-माल के खतरे कम होंगे, फसलों को नुकसान नहीं होगा और किसानों को खेती में आसानी होगी।
मुख्यमंत्री ने अंत में कहा, “हमारा लक्ष्य स्पष्ट है—किसानों को सशक्त बनाना, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना और एक समृद्ध व टिकाऊ पंजाब का निर्माण करना।”