भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल।
हिन्दू पंचांग के अनुसार शक संवत 1947 , विक्रमी संवत 2082 आज शनिवार , 28 फरवरी 2026 को फाल्गुन मास की शुक्ल द्वादशी तिथि है। आज चंद्रदेव पुनर्वसु नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। राहुकाल: प्रातः 09:41 बजे से प्रातः 11:07 बजे तक
पुनर्वसु नक्षत्र: प्रातः 09:35 बजे तक
तिथि: शुक्ल द्वादशी – रात्रि 08:43 बजे तक
योग: सौभाग्य – सायं 05:02 बजे तक
करण: बव – प्रातः 09:36 बजे तक
करण: बालव – रात्रि 08:43 बजे तक
सूर्योदय का समय: प्रातः 06:47 बजे
सूर्यास्त का समय: सायं 06:20 बजे
आज के शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:11 बजे से दोपहर 12:57 बजे तक
अमृत काल: प्रातः 07:18 बजे से प्रातः 08:49 बजे तक
अमृत काल: रात्रि 02:26 बजे (1 मार्च) से रात्रि 03:58 बजे (1 मार्च) तक
आज के अशुभ मुहूर्त
राहुकाल: प्रातः 09:41 बजे से प्रातः 11:07 बजे तक
गुलिकाल: प्रातः 06:47 बजे से प्रातः 08:14 बजे तक
यमगण्ड: दोपहर 02:00 बजे से दोपहर 03:27 बजे तक
भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार को समर्पित नृसिंह द्वादशी
भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार को समर्पित नृसिंह द्वादशी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखकर पूजा-अर्चना करते हैं और नृसिंह भगवान से शत्रु नाश, संकट निवारण और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। धर्म शास्त्रों में नृसिंह द्वादशी को गोविन्द द्वादशी भी कहा जाता है, इस दिन गोविन्द की पूजा की जाती है। शनिवार को नृसिंह द्वादशी पर त्रिपुष्कर योग भी बन रहा है, जो पूजा, दान, शुभ कार्यों के लिए बहुत फलदायी माना जाता है।
भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार को समर्पित नृसिंह द्वादशी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखकर पूजा-अर्चना करते हैं और नृसिंह भगवान से शत्रु नाश, संकट निवारण और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। धर्म शास्त्रों में नृसिंह द्वादशी को गोविन्द द्वादशी भी कहा जाता है, इस दिन गोविन्द की पूजा की जाती है। शनिवार को नृसिंह द्वादशी पर त्रिपुष्कर योग भी बन रहा है, जो पूजा, दान, शुभ कार्यों के लिए बहुत फलदायी माना जाता है।
कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।
हिंदू पंचांग को वैदिक पंचांग के नाम से जाना जाता है। पंचांग के माध्यम से समय और काल की सटीक गणना की जाती है। पंचांग मुख्य रूप से पांच अंगों से मिलकर बना होता है। ये पांच अंग तिथि, नक्षत्र, वार, योग और करण है। यहां हम दैनिक पंचांग में आपको शुभ मुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, तिथि, करण, नक्षत्र, सूर्य और चंद्र ग्रह की स्थिति, हिंदूमास और पक्ष आदि की जानकारी देते हैं।