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शिमला | नाच ना जाने आँगन टेढ़ा — अपनी वित्तीय विफलता छिपाने के लिए केंद्र को दोष दे रही हिमाचल सरकार” : टंडन

Updated on Wednesday, February 11, 2026 16:46 PM IST

“नाच ना जाने आँगन टेढ़ा — अपनी वित्तीय विफलता छिपाने के लिए केंद्र को दोष दे रही हिमाचल सरकार” : टंडन

“उत्तराखंड आगे, हिमाचल पीछे — समान भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद राजस्व व आय प्रबंधन में बड़ा अंतर”

“केंद्रीय बजट 2026 क्रांतिकारी और दूरदर्शी — विकसित भारत 2047 का मजबूत आर्थिक रोडमैप”

शिमला। भाजपा प्रदेश सह प्रभारी संजय टंडन ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि राज्य सरकार अपनी वित्तीय अव्यवस्था, बढ़ते कर्ज, राजकोषीय घाटे और गलत प्राथमिकताओं को छिपाने के लिए केंद्र सरकार पर निराधार आरोप लगा रही है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति “नाच ना जाने आँगन टेढ़ा” वाली है — जहां अपनी प्रशासनिक और वित्तीय विफलताओं का ठीकरा दूसरों पर फोड़ा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान (RDG) का चरणबद्ध समाप्त होना कोई अचानक लिया गया निर्णय नहीं है, बल्कि यह कई वित्त आयोगों से तय प्रक्रिया का हिस्सा रहा है। राज्य सरकार को पहले से इसकी जानकारी थी, फिर भी वैकल्पिक राजस्व स्रोत बढ़ाने और खर्च नियंत्रण की दिशा में गंभीर प्रयास नहीं किए गए।

टंडन ने कहा कि हिमाचल और उत्तराखंड जैसे समान पर्वतीय, सीमित संसाधन और पर्यटन आधारित राज्यों की तुलना करें तो उत्तराखंड ने राजस्व संग्रह, निवेश आकर्षण और वित्तीय अनुशासन में बेहतर प्रदर्शन किया है, जबकि हिमाचल में राजस्व घाटा और कर्ज अनुपात तेजी से बढ़ा है — यह अंतर नीति और प्रबंधन का अंतर दर्शाता है।

संजय टंडन ने कहा कि उपलब्ध सार्वजनिक वित्तीय आकलनों के अनुसार हिमाचल प्रदेश का कर्ज अनुपात 40% से अधिक के स्तर पर पहुंच चुका है, जो गंभीर चेतावनी का संकेत है। इसके विपरीत केंद्र सरकार ने अपना राजकोषीय घाटा नियंत्रित करते हुए इसे लगभग 4.3% तक लाने का लक्ष्य रखा है — वह भी पूंजीगत व्यय और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश बढ़ाते हुए।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार ने बड़ी संख्या में ओएसडी, सलाहकारों और राजनीतिक नियुक्तियों का विस्तार किया, जिससे राजस्व व्यय पर अनावश्यक बोझ बढ़ा। कई विभागों में सलाहकारों को लाखों रुपये मासिक वेतन, वाहन और अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले अपने घर का बजट नहीं संभाला और अब वित्तीय संकट का हवाला देकर केंद्र को दोष दे रही है।

टंडन ने कहा कि केंद्र सरकार की अधिकांश योजनाएं — शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, ग्रामीण विकास, जल, कृषि — 90:10 फंडिंग मॉडल पर चलती हैं। पूर्व भाजपा सरकार के समय इन योजनाओं का अधिकतम उपयोग कर परियोजनाएं लाई गईं, जबकि वर्तमान सरकार पहल और प्रोजेक्ट तैयारी में पिछड़ गई।

उन्होंने कहा कि अधिकारियों से प्रेस कॉन्फ्रेंस करवाकर भय और भ्रम का वातावरण बनाना गलत है। यदि सरकार के पास तथ्य हैं तो मुख्यमंत्री स्वयं सामने आकर जवाब दें। केंद्र सरकार ने हिमाचल के लिए कभी मदद से पीछे हटने का काम नहीं किया।

इसके बाद केंद्रीय बजट 2026 पर बोलते हुए भाजपा प्रदेश सह प्रभारी संजय टंडन ने कहा कि यह बजट एक क्रांतिकारी, दूरदर्शी और परिवर्तनकारी बजट है, जो भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में ठोस आधार देता है।
उन्होंने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार:
भारत की अर्थव्यवस्था लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 4.3 ट्रिलियन डॉलर हो चुकी है
भारत विश्व की 11वीं से चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना
सकल एनपीए लगभग 11% से घटकर 2% से नीचे आया
नेट एनपीए 1% से नीचे
60 करोड़ से अधिक बैंक खाते सक्रिय
वैश्विक रियल-टाइम डिजिटल भुगतान का लगभग 49% भारत में
पूंजीगत व्यय के लिए बजट में लगभग ₹12 लाख करोड़ का प्रावधान
उन्होंने कहा कि बजट में युवाओं, महिलाओं, किसानों, एमएसएमई, उद्यमियों और निवेशकों — सभी वर्गों के लिए ठोस प्रावधान किए गए हैं। आयकर अनुपालन सरल किया गया है, रिटर्न संशोधन की समय सीमा बढ़ाई गई है, डेटा सेंटर और उभरते क्षेत्रों को टैक्स प्रोत्साहन दिया गया है, और इंफ्रास्ट्रक्चर, रेलवे, सड़क, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक्स पर रिकॉर्ड निवेश रखा गया है।

अंत में उन्होंने कहा कि जहां केंद्र सरकार वित्तीय अनुशासन के साथ विकास का मॉडल प्रस्तुत कर रही है, वहीं हिमाचल की कांग्रेस सरकार कुप्रबंधन और दोषारोपण की राजनीति कर रही है। जनता तथ्यों को समझती है और समय आने पर जवाब देगी।

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