पालमपुर कभी कूहलों का क्षेत्र हुआ करता था देखते ही देखते बाबाओं का क्षेत्र बन गया ! राम रहीम, राधा स्वामी, श्री श्री रविशंकर यहां तक कि आसाराम के अनुयायियों ने भी उनके नाम से यहां जमीन खरीद रखी है ! यह तो बलात्कार के आरोप में वो जेल चले गए वर्ना उनका भी यहां एक भव्य आश्रम होता ! राम रहीम(बलात्कार, हत्या के आरोप में सजा काट रहे) का सच्चा सौदा आश्रम भी कई एकड़ में फैला है !
राधा स्वामी को पूर्व की हिमाचल भाजपा सरकार ने कृषक का दर्जा दे रखा है यानी वो अब अपनी मर्जी से पूरे हिमाचल में कहीं भी जमीन खरीद और बेच सकते हैं ! विवादों से उनका भी चोली दामन का साथ रहा है, पालमपुर उपमंडल के स्थानीय लोगों ने उनके विरुद्ध प्रदर्शन और आक्रोश रैलियां निकाली हैं तो पंजाब में ब्यास नदी के किनारे बसे गाँवों में तबाही के लिए उन्हें जिम्मेदार माना है क्योंकि उन्होंने अपने डेरे के अतिक्रमण के लिए नदी का रुख ही मोड़ दिया ऐसा वहां के लोग कहते हैं!
हाल ही में राधा स्वामी सत्संग के गुरु जिन्हें हजूर भी कहते हैं की बिक्रम सिंह मजीठिया जो ड्रग तस्करी के आरोप में जेल में बंद है के साथ मुलाकात भी चर्चा का विषय रही! ये बाबाओं के किस्से और कहानियां तो कभी समाप्त नहीं होंगे परंतु हैरानी इस बात की है कि सभी के सभी बाबाओं को पालमपुर उपमंडल ही क्यों पसन्द आया???? आज सैंकड़ों एकड़ भूमि पर इनका कब्जा है और हर पार्टी का नेता इनके पास हाजरी भरने क्यों आता है? एक बाबा कंडवाड़ी में भी बहुत बड़े भूखण्ड पर विराजमान हैं जो धूमल और बाली जी के बहुत करीब हैं!
शिकायत बाबाओं से नहीं परन्तु बाबाओं और राजनीति के रिश्ते पर हैरानी होती है
शिकायत बाबाओं से नहीं परन्तु बाबाओं और राजनीति के रिश्ते पर हैरानी होती है???? क्या नेताओं के लिए आपराधिक छबि वाले ये बाबा एक मजबूत वोट बैंक हैं ? किस मानसिकता के हैं इनके अनुयायी? क्या वो अपने गुरुओं के कहने पर चोर उच्चके भ्रष्ट नेताओं को वोट डालते हैं? अगर ऐसा है तो व्यवस्था कैसे बदलेगी? कैसे बदलेंगे जनता के दिन??? सोचना होगा आम जनता को कि इन बाबाओं के माया जाल से कैसे बचा जाए?
शिकायत बाबाओं से नहीं परन्तु बाबाओं और राजनीति के रिश्ते पर हैरानी होती है???? क्या नेताओं के लिए आपराधिक छबि वाले ये बाबा एक मजबूत वोट बैंक हैं ? किस मानसिकता के हैं इनके अनुयायी? क्या वो अपने गुरुओं के कहने पर चोर उच्चके भ्रष्ट नेताओं को वोट डालते हैं? अगर ऐसा है तो व्यवस्था कैसे बदलेगी? कैसे बदलेंगे जनता के दिन??? सोचना होगा आम जनता को कि इन बाबाओं के माया जाल से कैसे बचा जाए?
बाबा अर्थात सन्यासी का राजनीति से कोई संबंध होना ही नहीं चाहिए , जो बाबा राजनीति से फायदा उठाए वो सन्यासी नहीं व्यापारी है ! अपने अनुयायियों और गरीब जनता को थोड़ा बहुत दे कर बहुत कुछ कमा जाता है ! महँगी गाड़ियों में घूमना , ऐश्वर्य युक्त जीवन जीना, लोगों की जी हजूरी सुनना इन्हें पसन्द है ये भी हम और आप जैसे आम लोग ही हैं बस इनकी कम्युनिकेशन स्किल हम और आप से बेहतर है जिस बात फायदा ये लोग उठाते हैं और इनका फायदा नेता लोग! हमारी समस्या तो सूखती कूहलों की थी ,जिनपर अतिक्रमण हुआ, जिन्हें कूड़े कचरे का घर बना दिया गया , सिंचाई सुविधा न होने से कृषि समाप्त हो गई... क्या कोई बाबा या राज नेता हमारी समस्या का समाधान निकालेगा??? आओ आत्ममंथन करें प्रकृति की इस transformation की प्रक्रिया को हम कैसे रोकें???????