हिमाचल प्रदेश के प्रिय नागरिकों के नाम हमारा संदेश।
देवभूमि हिमाचल की संस्कृति और पहचान हमारे पवित्र मंदिरों, देवस्थलों और यहाँ बसे देवपरंपरा में निहित है। हाल ही में कुल्लू में 350 से अधिक देवताओं की विशाल सभा ने यह स्पष्ट किया है कि हमारे धर्म, संस्कृति और प्रकृति का सम्मान करना हिमाचल के भविष्य के लिए अनिवार्य है। हम एक सच्चे आस्थावान और आपके जनप्रतिनिधि के रूप में यह प्रतिज्ञा लेते हैं कि धार्मिक स्थलों, देव नीति और प्राकृतिक संपदा के संरक्षण को राज्य की प्राथमिकता बनाने का हर सम्भव प्रयास करेंगे।
सच्ची भक्ति तब ही साकार होती है जब हमारे विचार और कार्य पर्यावरण तथा प्रकृति के अनुकूल हों। हर विकास कार्य—चाहे वह सड़क, पर्यटन या शहरीकरण—राज्य की पवित्र स्थल और देव संस्कृति को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए। सतत विकास के रास्ते पर हम तभी सफल होंगे जब हिमाचल की संस्कृति, परंपरा और मंदिरों की पवित्रता अक्षुण्ण रहे। सरकार और प्रशासन के स्तर पर हम यह जिम्मेदारी सुनिश्चित करेंगे कि सभी योजनाओं और परियोजनाओं में हिमाचल की सांस्कृतिक विरासत, पर्यावरण व मंदिर रक्षा को सर्वोपरि रखा जाए।
हम कुल्लू में संपन्न हुई देवताओं की दिव्य सभा का पूर्ण समर्थन करते हैं। देव समाज और आम नागरिकों से आग्रह करते हैं कि वे सजग रहकर मंदिरों, धार्मिक स्थलों और प्राकृतिक सुंदरता की रक्षा में सहयोग करें। हिमाचल ग्रीन डेवलपमेंट फंड, क्लाइमेट स्मार्ट बिल्डिंग कोड और पारंपरिक ज्ञान को नीतिगत स्तर पर शामिल कर राज्य के सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण को हम सब मिलकर सुनिश्चित करेंगे।
आस्था, संस्कृति और प्रकृति—इन तीनों के संरक्षण से ही हिमाचल का भविष्य सुरक्षित रहेगा। आने वाली पीढ़ियों के लिए हिमाचल की आध्यात्मिक और प्राकृतिक धरोहर को बचाए रखने का संकल्प ही देवभूमि के सच्चे भक्त और नागरिक का कर्तव्य है।
विक्रमादित्य सिंह
लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री,
हिमाचल प्रदेश ।