आज देश के पहले गृह मंत्री लोह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन् । किंतु क्या हम जानते हैं कि हिमाचल प्रदेश का लोह पुरुष कौन है हिमाचल प्रदेश के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल और कोई नहीं हिमाचल प्रदेश के पहले उपमुख्यमंत्री की के पद को सुशोभित करने के साथ-साथ , छह अन्य मंत्रालय संभालने वाले पंडित पद्म देव जी हैं ।
और मेरे द्वारा ऐसा कहने के पीछे एक ठोस कारण भी है जैसे सरदार वल्लभभाई पटेल को सांसद दल का नेता चुने जाने यानी की कल 16 वोट में से 14 वोट मिलने के बावजूद प्रधानमंत्री नहीं बनाया गया था ठीक वैसे ही हिमाचल में भी कुछ हुआ था ।
जब टेरिटोरियल काउंसिल द्वारा हिमाचल प्रदेश का मुख्यमंत्री चुने जाने की बात आई तो 36 में से 24 वोट लेकर पंडित पद्म देव जी मुख्यमंत्री पद के दावेदार बने किंतु उन्होंने यह पद अपने से 5 वर्ष छोटे और हिमाचल प्रजामंडल में उनके कनिष्ठ साथी डॉक्टर यशवंत सिंह परमार को यह कहकर सौंप दिया की डॉक्टर परमार की अंग्रेजी में पकड़ बहुत अच्छी है एक मुख्यमंत्री के रूप में जब उनसे बाहरी प्रदेशों एवं देश के नेता मिलने आएंगे तो वह अच्छे से वार्तालाप कर पाएंगे उनकी बातों को समझ पाएंगे !
खेद की बात है कि आगे चलकर इन्हीं पंडित पद्म देव जी के साथ हिमाचल प्रदेश और उनकी अपनी पार्टी आज तक न्याय नहीं कर पाए । उनके राजनीतिक कैरियर एवं कद को सदैव खत्म करने की साजिश में होती रहीं । यह अलग बात है उनके कद को देखते हुए डॉ यशवंत सिंह परमार मंत्रिमंडल में उन्हें हिमाचल प्रदेश का पहला उपमुख्यमंत्री बनाया ।
उनके योगदान को न्याय देने की पहल अगर किसी ने की तो शांता कुमार जी ने , हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के रिज मैदान पर पंडित पद्म देव व्यावसायिक परिसर की नींव रखकर , जिसका उद्घाटन राजा वीरभद्र सिंह जी ने किया । यह भवन वही भवन है जहां पर कई दुकानें व कार्यालय हैं हिमाचल प्रदेश की राजधानी का प्रेस क्लब भी इसी भवन में अवस्थित है , इसी भवन की छत पर जहां पंडित पदम देव जी का स्टेचू लगना था , पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का स्टैचू लगा हुआ है । आज इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि भी है उन्हें भी शत-शत नमन्
स्टैचू के नाम से याद आया कि हाल ही में राजा वीरभद्र सिंह जी का स्टैचू भी रिज मैदान पर लगाया गया है । स्वतंत्रता आंदोलन में पंडित पद्म देव जी के दिए गए योगदान और हिमाचल प्रदेश के मंत्री सांसद होने के नाते जब यह भवन उनके नाम पर बनाया गया स्टैचू तो पंडित पद्म देव जी का भी लगना था और वह तैयार भी लगभग 25-30 वर्षों से है, किंतु हाय रे राजनीति, पिछले 25-30 वर्षों से किसी के घर में रखा गया है !
पंडित पद्म देव जी के कार्य , पहचान एवं कद इतना बड़ा था कि उस दौर में भी जब संचार के साधन बिल्कुल भी नहीं थे सड़क मार्ग भी कहीं-कहीं थे उसे समय में भी चंबा से लेकर सिरमौर तक बच्चा-बच्चा उन्हें जानता था, बावजूद इसके वे सदैव जमीन से जुड़े हुए रहे । कहा तो यह भी जाता है कि जिन डॉ यशवंत सिंह परमार जी को आगे बढ़ाने में पंडित जी ने मदद करी नेता बनाया हिमाचल निर्माता बनने का गौरव प्रदान किया उन्हें परमार जी ने भी उनके राजनीतिक कैरियर को लगभग समाप्त करने की कई कोशिश की । प्रदेश की राजनीति से बाहर करने का कई बार प्रयास किया गया पंडित जवाहरलाल नेहरू इंदिरा गांधी शंकर दयाल शर्मा बाबू जगजीवन राम जैसे कई बड़े दिग्गज नेताओं के साथ व्यक्तिगत संबंध होने के कारण उन्हें नजर अंदाज करना मुश्किल हो गया तो एक साजिश के तहत लोकसभा सीट शिमला से टिकट न देकर चंबा भेज दिया गया और उनके विरुद्ध मुंबई के एक बड़े सेठ को खड़ा कर दिया गया जिसने उसे जमाने में भी खूब पैसा बहाया किंतु यह पंडित जी के कार्य उनकी पहचान ही थी कि धन बल के आगे अपनी कार्यशाली ,मजबूत पहचान सन 1957 में चंबा लोकसभा सीट से में सांसद के रूप में लोकसभा के चुन लिए गए ।
पंडित पद्म देव जी हिमाचल प्रदेश के वह पहले राजनीतिक व्यक्ति हुए जिन्होंने आजादी के पूर्व से लेकर अपने मंत्री एवं सांसद रहने तक छुआछूत जात-पात अस्पृश्यता नारी सशक्तिकरण पर्यावरण नीति हिमाचल प्रदेश की पर्यटन नीति सड़क एवं भवन निर्माण आदि कई विषयों पर बहुत बड़ा काम किया । आजादी से पूर्व राजा बुशहर रियासत की कई नीतियों के खिलाफ उन्होंने जनता को एकजुट किया आंदोलन किया राजा बुशहर ने भी उन्हें अरेस्ट करने के आदेश तक दे दिए थे किंतु कभी सफल नहीं हो पाए । बावजूद इसके आजादी के बाद राजा वीरभद्र सिंह के साथ उनके मधुर संबंध बन रहे ।
हिमाचल प्रदेश में हिमाचल मित्र प्रजामंडल की स्थापना सुकेत सत्याग्रह कई आंदोलन का न केवल गठन किया अभी तो आगे बढ़कर प्रतिनिधित्व भी किया । पंडित जी की जिजीविषा हिम्मत के दर्शन इसी बात से हो जाते हैं कि हिमाचल प्रजामंडल का एक प्रतिनिधिमंडल लेकर उन्होंने हैदराबाद के निजाम के खिलाफ हैदराबाद में जाकर आंदोलन किया फल स्वरूप उन्हें कैद कर लिया गया, किंतु वे चालाकी से चकमा देते हुए निजाम की कैद से भी भाग खड़े हुए और उन्हें जेल वाले कपड़ों में दो महीने बाद अपने गृह प्रदेश पहुंचे ।
पंडित शंकर दयाल शर्मा उनके साथ मिलने उनके घर तक आते रहे हैं रोहड़ू का भमनोली गांव तब देश भर के बड़े-बड़े नेताओं के आगमन से गुलजार रहता था ।
1952 में पंडित जवाहरलाल नेहरू कुछ दिनों की छुट्टियां मनाने जब हिमाचल प्रदेश के जिला शिमला के खदराला में आए और ठहरे तो वह भी पंडित पद्म देव जी की बदौलत । उस समय पहली बार नारकंडा से खदराला वाया बाघी सड़क को पक्का किया गया । यह वही ऐतिहासिक रेस्ट हाउस है जहां कभी देश का प्रधानमंत्री रुका हो और जो कि वर्तमान में बिल्कुल जर्जर हो चुका है और हालात ऐसे हैं यहां इसके प्रांगण में खच्चर बांधे जाते रहे हैं ।
पंडित पदम देव जी आशु कवि भी रहे हैं, उन्हें लाहौर जैसे बड़े शहर में कविराज की उपाधि दी गई थी उन्होंने साहित्य के क्षेत्र में भी में उल्लेखनीय कार्य किया है किंतु खेद कि न तो हिमाचल सरकार ने न ही भाषा एवं संस्कृति विभाग इसे सामने लाने में रुचि दिखाई ।
पंडित पद्मदेव जी के स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर समाज सेवा राजनीति योगदान पर एक पुस्तक लिख रहा हूं जिसमें अन्य जानकारियां विस्तार से मिलेंगी ।
फिलहाल लोह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जी की जयंती के बहाने हिमाचल प्रदेश के लोह पुरुष को याद करने का मन किया तो अपने मन के विचार आप सबके साथ सांझा किया जाए , हम सब शिमला के रिज मैदान में पंडित पद्म देव व्यावसायिक परिसर में उनके नाम पर स्टैचू लगने वाले स्टैचू जो की हिमाचल सरकार ने ही लगाना था किंतु राजनीतिक कारणों से एक साजिश के चलते 25 - 30 वर्षों से लगाया नहीं गया और मजबूरन एक घर में रखा गया है को उसके उचित स्थान पर स्थापित करने हेतु संघर्ष करें ।