जिला कांगड़ा स्वास्थ्य विभाग द्वारा विश्व तंबाकू निषेध दिवस के उपलक्ष्य में कार्यशाला का आयोजन जोनल अस्पताल कांगड़ा में किया गयाl जिसकी अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश गुलेरी ने की । इस कार्यशाला का संचालन जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ राजेश सूद और जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अनुराधा ने किया ।
इस दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश गुलेरी ने बताया कि विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाने के पीछे का उद्देश्य लोगों को तंबाकू का सेवन करने से रोकने और इससे होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करना है l
इस वर्ष की थीम 'आकर्षण का पर्दाफाश' , से जुड़ी जानकारी देते हुए उन्होंने बताया इस वर्ष का थीम तम्बाकू उद्योग की उन चालाकीपूर्ण रणनीतियों को उजागर करना जिनसे वह लोगों को तंबाकू का उपयोग करने के लिए आकर्षित करता है । तंबाकू के सेवन से दुनिया में हर साल 80 लाख से ज्यादा लोगों की मृत्यु हो जाती है l बावजूद इसके लोग तंबाकू का सेवन करना बंद नहीं करते हैं l डॉ गुलेरी ने बताया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में लगभग 15% पुरुष और 1% महिलाएं किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं। कांगड़ा जिला, जो प्रदेश का सबसे अधिक जनसंख्या वाला जिला है, भी इससे अछूता नहीं है।
उन्होंने कहा कि कांगड़ा जिला, जो प्रदेश का सबसे अधिक जनसंख्या वाला क्षेत्र है, यहां स्वास्थ्य विभाग जागरूकता अभियानों, स्कूल कार्यक्रमों और निगरानी के माध्यम से तंबाकू नियंत्रण में प्रयासरत है।
स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, तंबाकू सेवन से जुड़ी बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं, जिसमें मुख्यतः युवा वर्ग में में ये आदत अधिक बढ़ रही है ।
जानकारी देते हुए डॉ गुलेरी ने बताया कि तंबाकू के सेवन से मुंह का कैंसर, हार्ट डिजीज, सांस की बीमारी, गले का कैंसर, यूरिन ब्लैडर केंसर, हार्ट डिजीज जैसे खतरनाक रोग हो सकते हैं l जिससे जान भी जा सकती है l डॉ गुलेरी ने कहा कि तंबाकू से होने वाले घातक परिणामों को देखते हुए हमें तंबाकू के सेवन को रोकना होगा तथा तंबाकू का प्रयोग न करने के लिए लोगों को जागरूक करना होगा l डॉ गुलेरी ने बताया कि कैसे व्यक्ति नशे का शिकार होता है, और धीरे-धीरे इसका आदी हो जाता है l डॉ गुलेरी ने बताया कि जब व्यक्ति नशा करता है तो हमारे शरीर में डोपामाइन नाम का हार्मोन रिलीज होता है जो थोड़े समय हमें खुशी देता है, उसके बाद व्यक्ति फिर से निराश हो जाता है l और दोबारा से नशे की तरफ बढ़ने लगता है l डॉ गुलेरी ने कहा कि नशे की शुरुआत आदमी यही से करता है, इसके बाद धीरे-धीरे सभी नशे में शामिल हो जाता है l इसलिए तंबाकू के सेवन से दूर रहना ही सबसे अच्छा विकल्प है 31 मई 1988 को पहली बार विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया गया l
डॉ गुलेरी ने जानकारी देते हुए बताया की हिमाचल प्रदेश और कांगड़ा की स्थिति (GATS-2 के अनुसार):
हिमाचल प्रदेश में तंबाकू उपयोग की दर 21.2% से घटकर 16.1% हो गई है।
जबकि धूम्रपान की दर 18.3% से घटकर 14.2%, और धूम्रपान रहित उपयोग 4.5% से घटकर 3.1% हुई है। वहीं घर में दूसरे हाथ के धुएं के संपर्क में आने की दर 82.9% से घटकर 32.5%, और सार्वजनिक स्थानों पर यह 12% रह गई है।
स्वास्थ्य पर प्रभाव :
तंबाकू का धुआं 7000 से अधिक रसायनों का मिश्रण होता है, जिनमें से 70 से अधिक कैंसर पैदा करने वाले होते हैं। डॉ गुलेरी ने बताया कि धूम्रपान करने वालों की औसत आयु लगभग 10 वर्ष कम होती है। जबकि तंबाकू से हर साल भारत में करीब 13 लाख मौतें होती हैं।
डॉ गुलेरी ने जन साधारण से अनुरोध किया कि तम्बाकू से बचाव के संदेश को जन-जन तक पहुंचाएं ताकि सभी बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके ।
इस दौरान जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ राजेश सूद , जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अनुराधा, बीएमओ , एवम चिकित्सा अधिकारी , स्वास्थ्य शिक्षक अर्चना गुरंग व स्टाफ उपस्थित रहा ।