श्रावण सोमवार के दिन शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करें, "ॐ नमः शिवाय" मंत्र की एक माला का जाप करें तथा किसी जरूरतमंद को अन्न, दूध या सफेद वस्त्र का दान करें। इससे भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, समृद्धि एवं शांति का वास होता है।
श्रावण सोमवार का व्रत भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है। इस दिन रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप तथा शिव चालीसा का पाठ करने से समस्त कष्टों का निवारण होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। अविवाहित युवक-युवतियों के लिए भी श्रावण सोमवार का व्रत विशेष फलदायी माना गया है।
सुबह में 7 बजकर 30 मिनट से 9 बजे तक राहुकाल रहेगा। दोपहर में 1 बजकर 30 मिनट से 3 बजे तक गुलिक काल रहेगा। सुबह में 10 बजकर 30 मिनट से 12 बजे तक यमगंड रहेगा। अमृत काल का समय सुबह में 5 बजकर 32 मिनट से 7 बजकर 16 मिनट तक। दुर्मुहूर्त काल दोपहर में 12 बजकर 55 मिनट से 1 बजकर 50 मिनट तक। पंचक पूरे दिन रहेगा।
अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।
वैदिक पंचांग के अनुसार, श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 20 अगस्त मध्य रात्रि 12: 23 बजे से शुरू होगी और 21 अगस्त रात्रि 2 बजे समाप्त हो जाएगी। ऐसे में नाग पंचमी व्रत (21 अगस्त) सोमवार के दिन रखा जाएगा। पंचांग में बताया गया है कि नाग पंचमी पर्व के दिन पूजा मुहूर्त सुबह 05:53 बजे से सुबह 08: 30 बजे तक रहेगा।
पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल।