भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल। 10 अगस्त 2026 का पंचांग: आज सोमवार के दिन श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का विशेष महत्व है। आज श्रावण सोमवार और सोम प्रदोष व्रत का शुभ संयोग बन रहा है। आइए जानते हैं 10 अगस्त 2026 के पंचांग में तिथि, नक्षत्र, योग, राहुकाल, सूर्योदय-सूर्यास्त और प्रदोष पूजा के शुभ समय की पूरी जानकारी।
हिन्दू पंचांग के अनुसार आज श्रावण, कृष्ण, द्वादशी, सोमवार, है। सूर्य दक्षिणायन, उत्तर गोल, वर्षा ऋतु। शक संवत 1948 , विक्रमी संवत 2083, 10 अगस्त 2026,राहुकाल सुबह 07:30 से सुबह 09:00 बजे तक ।
दिन: सोमवार
तारीख: 10 अगस्त 2026
मास: श्रावण
पक्ष: कृष्ण पक्ष
विक्रम संवत: 2083
शक संवत: 1948
🌙 आज की तिथि
कृष्ण पक्ष द्वादशी सुबह 08 बजकर 00 मिनट तक रहेगी, इसके बाद त्रयोदशी तिथि प्रारंभ होगी। इसी कारण 10 अगस्त को सोम प्रदोष व्रत का विशेष महत्व रहेगा।
⭐ आज का नक्षत्र
आर्द्रा नक्षत्र दोपहर तक रहेगा। इसके बाद पुनर्वसु नक्षत्र प्रारंभ होगा।
🕉️ आज का योग वज्र योग रहेगा।
सूर्योदय: लगभग 5:55 बजे
सूर्यास्त: लगभग 7:06 बजे
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त : सुबह में 03 बजकर 55 मिनट से सुबह 04 बजकर 41 मिनट तक ।
अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12 बजकर 00 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक ।
अमृत काल : कोई नहीं है।
अशुभ मुहूर्त
राहुकाल : सुबह 07 बजकर 30 मिनट से 09 बजकर 00 मिनट तक ।
गुलिक काल : दोपहर 01 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 00 मिनट तक ।
यमगंड : सुबह 10 बजकर 30 मिनट से दोपहर 12 बजकर 00 मिनट तक ।
🙏 धार्मिक महत्व
10 अगस्त 2026 को श्रावण सोमवार और सोम प्रदोष व्रत का विशेष संयोग बन रहा है। श्रावण मास भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। सोमवार के दिन शिव आराधना के साथ प्रदोष व्रत का संयोग होने से इस दिन का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।
भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक कर बेलपत्र, दूध, पुष्प और धतूरा अर्पित कर सकते हैं। शाम के समय प्रदोष काल में शिव-पार्वती की पूजा करना विशेष शुभ माना जाता है।
🪔 प्रदोष पूजा का समय
शाम 7:14 बजे से रात 9:21 बजे तक (धर्मशाला क्षेत्र के अनुसार)
📿 आज का शिव मंत्र ॐ नमः शिवाय
🌺 आज का संदेश
श्रावण सोमवार और सोम प्रदोष के इस पावन अवसर पर भगवान भोलेनाथ की आराधना करें और सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना करें। हर हर महादेव!
कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।