गुग्गा मंडलियां रक्षा बंधन के दिन से नंगे पांव अपने अपने मंदिरों से निकलीं हैं। जो जन्माअष्टमी के अगले दिन वापिस अपने घरों में वापिस पहुंचेंगी। मंडली में चलना आसान नहीं है, इसके लिये भादों माह की पूर्णिमा से लेकर जन्ताष्टमी के अगले दिन तक छत्र ले कर चलने वाले प्रमुख पुजारी को नंग पांव चलना होता है, यह लोग जमीन पर भी नहीं बैठ सकते।