गुग्गा जाहरवीर को शेषनाग का अवतार माना जाता है। गुग्गा जाहरवीर के व्रत पूजन से मनुष्य का कल्याण हो सकेगा। बांझ स्त्री पुत्रवती हो जाएगी और निर्धन धनवान बन जाएगा। असाध्य रोगी मूर्ख को भी ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति हो जाएगी।
गुग्गावीर का उपासक संसार में समस्त सुखों को भोगने के बाद अंत में शिवलोक पहुंच कर परम आनंद में विलीन हो जाएगा। ऐसा वरदान नाथ पंथ के गुरु गोरख नाथ ने जाहरवीर को दिया है। प्रत्येक माह के कृष्ण एवं शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को गुग्गा का व्रत किया जाता है लेकिन सावन भादो की नवमी को इसका विशेष महत्व है।
मान्यता है कि 9 दिन गुग्गा जाहरवीर का गुणगान करने वाले श्रद्धालुओं को उत्तम फल की प्राप्ति होती है। गुग्गा महापुराण में कहा गया है कि गुग्गा जाहरवीर के साथ 33 करोड़ देवता, 84 सिद्ध, 9 नाथ, 1 लाख 24 हजार पैगम्बर, 64 सिद्ध जोगणी, 22 हजार पीर ख्वाजा, 7 देवियां, 23 कुतुब, साढ़े 12 पंथ, 52 वीर, 5 पीर, 41 मलंग, कलुबे वीर, बेताल, हनुमान, शनिदेव, काली माता व गुरु गोरखनाथ चलते हैं। रक्षाबंधन से लेकर गुग्गा नवमी तक जो सच्चे मन से गुग्गा जी की महिमा का गुणगान करते हैं, उनके सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
गोगा नवमी का त्योहार कई राज्यों में मनाया जाता है। इसे गुग्गा नवमी भी कहा जाता है।
इस वर्ष भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि शुक्रवार, 08 सितम्बर को आ रही है। यह तिथि गोगा नवमी के नाम से प्रसिद्ध है। इस दिन गोगा देव (श्री जाहरवीर) का जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।
इस दिन नागों की पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि गोगा देव की पूजा करने से सांपों से रक्षा होती है। गोगा देव की पूजा श्रावणी पूर्णिमा से आरंभ हो जाती है तथा यह पूजा-पाठ 9 दिनों तक चलता है यानी नवमी तिथि तक गोगा देव का पूजन किया जाता है इसलिए इसे गोगा नवमी कहते हैं। यह पर्व बहुत ही श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है।
इस अवसर पर बाबा जाहरवीर (गोगाजी) के भक्त अपने घरों में ईष्टदेव की वेदी बनाकर अखंड ज्योति जागरण कराते हैं तथा गोगा देवजी की शौर्य गाथा एवं जन्म कथा सुनते हैं। इस प्रथा को जाहरवीर का जोत कथा जागरण कहा जाता है। कई स्थानों पर इस दिन मेले लगते हैं व शोभायात्राएं निकाली जाती हैं। निशानों का यह कारवां कई शहरों में पूरी रात निकलता है। इस दिन भक्त अपने घरों में जाहरवीर पूजा और हवन करके उन्हें खीर तथा मालपुआ का भोग लगाते हैं।