8 अगस्त को श्रावण कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ होने के कारण भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व रहेगा। कामिका एकादशी व्रत 9 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। एकादशी व्रत रखने वाले श्रद्धालु इस दिन से व्रत की तैयारियां कर सकते हैं।
कामिका एकादशी के अवसर पर आयोजित भव्य कीर्तन में श्रद्धालु भगवान श्रीहरि विष्णु के भजनों का गुणगान करेंगे। धार्मिक वातावरण में होने वाले इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। आयोजकों की ओर से श्रद्धालुओं से धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होकर भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करने का आह्वान किया गया है।
कामिका एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम, भक्ति और सेवा का पर्व है। श्रद्धापूर्वक भगवान विष्णु की आराधना करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। यदि संभव हो तो इस दिन दान-पुण्य और जरूरतमंदों की सहायता अवश्य करें।
एकादशी व्रत, देवी एकादशी को समर्पित है जो भगवान विष्णु से ही उत्पन्न हुई है। एकादशी देवी का प्राकट्य भी एकादशी तिथि को हुआ है इसलिए भगवान विष्णु ने इनका नाम भी एकादशी रखा है और इन्हें वरदान दिया है कि जो भी एकादशी तिथि को व्रत रखेगा और एकादशी के साथ भगवान विष्णु की पूजा करेगा वह पाप मुक्त होकर उत्तम लोक को प्राप्त होगा। जिस एकादशी तिथि को देवी एकादशी का प्राकट्य हुआ है उस एकादशी को उत्पन्न एकादशी के नाम से जाना जाता है।
देवशयनी एकादशी आषाढ़ शुक्ल एकादशी को मनाई जाती है। इस बार देवशयनी एकादशी 6 जुलाई दिन रविवार को मनाई जाएगी। देवशयनी एकादशी को लेकर मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने के शयनकाल पर चले जाते हैं। इस एकादशी को हरिशयनी एकादशी या पद्मा एकादशी भी कहते हैं। इसी दिन चातुर्मास भी शुरू होता है। मान्यता है कि देवशयनी एकादशी का व्रत करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति सालभर सभी एकादशी का व्रत करता है और व्रत के नियमों का अच्छे से पालन करता है। उसे बैकुंठ में स्थान मिलता है। एकादशी का व्रत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित हैं।
अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।
पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल।