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गुग्गा जाहरवीर

गुग्गा मंडलियां नंगे पांव घर घर जाकर गुग्गा जाहरवीर का गुणगान कर रही
धर्मशाला

गुग्गा मंडलियां नंगे पांव घर घर जाकर गुग्गा जाहरवीर का गुणगान कर रही

गुग्गा जाहरवीर की वीर गाथाएं यह लोग सुनाते हैं। जिसे सुन लोग धन्य हो जाते हेंैं। गुग्गा जाहरवीर लोकदेवता हैं। हिमाचल के साथ साथ राजस्थान में भी इनकी पूजा लोग करते हैं। पुरातन काल से ही इन दिनों गाथाओं को सुनाया जाता है। प्राचीन परंपराओं के अनुसार इन गाथाओं का अहम महत्व है। इन गाथाओं का गान जन्माष्टमी के अगले दिन तक चलता रहेगा।

मंडलियां नंगे पांव करती हैं घर घर जाकर गुग्गा जाहरवीर का गुणगान
धर्मशाला

मंडलियां नंगे पांव करती हैं घर घर जाकर गुग्गा जाहरवीर का गुणगान

गुग्गा मंडलियां रक्षा बंधन के दिन से नंगे पांव अपने अपने मंदिरों से निकलीं हैं। जो जन्माअष्टमी के अगले दिन वापिस अपने घरों में वापिस पहुंचेंगी। मंडली में चलना आसान नहीं है, इसके लिये भादों माह की पूर्णिमा से लेकर जन्ताष्टमी के अगले दिन तक छत्र ले कर चलने वाले प्रमुख पुजारी को नंग पांव चलना होता है, यह लोग जमीन पर भी नहीं बैठ सकते।

हिमाचल व राजस्थान के लोक देवता हैं गुग्गा जाहरवीर
धर्मशाला

हिमाचल व राजस्थान के लोक देवता हैं गुग्गा जाहरवीर

गुग्गावीर का उपासक संसार में समस्त सुखों को भोगने के बाद अंत में शिवलोक पहुंच कर परम आनंद में विलीन हो जाएगा। ऐसा वरदान नाथ पंथ के गुरु गोरख नाथ ने जाहरवीर को दिया है। प्रत्येक माह के कृष्ण एवं शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को गुग्गा का व्रत किया जाता है लेकिन सावन भादो की नवमी को इसका विशेष महत्व है।

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