41 किलो वजनी इंक पेन की खासयित
41 किलो वजनी इंक पेन की खासयित सुनकर आप भी हो जायेंगे हैरान
शिमला। हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के एक टीचर ने अब ऐसा पेन भी तैयार किया है , जो शिक्षक की गैरमौजूदगी में भी बच्चों को क्लासरूम में पढाई करा सकेगा। इससे अब स्कूलों में शिक्षकों की कमी से भी निपटा जा सकेगा। इसी के चलते इस पेन की इन दिनों खासी चरचा हो रही है। इस पेन को देखने वालों की स्कूल में रोजाना भीड लग रही है।
41 किलो वजनी इंक पेन की खासयित
प्रदेश के जिला सिरमौर धौलाकुआं के सरकारी स्कूल के टीचर के इस अविष्कार की खूबियां देख और सुनकर सब हैरान हैं। अपनी तरह का यह विशव का पहला इंक पेन है। जो शिक्षक की गैरमौजूदगी में कलासरूम में टीचर की मौजूदगी का अहसास करायेगा। धौलाकुआं के राजकीय उच्च विद्यालय नौरंगाबाद के मुख्याध्यापक एवं विज्ञान के शिक्षक डॉ. संजीव अत्री ने इसे बनाया है। साउंड सेंसर वाला बीस फीट लंबा और एक फुट चौडा पेन हैं।
विशव में अपनी तरह का पहला इंक पेन लकडी से बनाया गया है। और इसका वजन 41 किलोग्राम है। इसमें सीसीटीवी कैमरा भी लगा है। और साउंड सेंसर के जरिये पहले से ही रखी गई सामग्री को सामने ला सकेगा। यानि, कोई शिक्षक यदि अगले दिन अवकाश करने वाला है तो एक दिन पहले पाठय सामग्री तैयार करवाकर पेन में रख दी जाएगी। अगले दिन बच्चों को पेन के समीप बिठाकर छुट्टी पर गए शिक्षक की आवाज में पढ़ाकर सेंसर अपना काम शुरू कर देगा। पेन के ढक्कन वाले हिस्से पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जिसका नियंत्रण स्कूल प्रबंधन के पास रहेगा। कार्यालय में बैठकर स्कूल प्रबंधन परिसर में बच्चों पर नजर रख सकेगा और साउंड सेंसर के जरिये बच्चों का नाम भी पुकारा जा सकेगा। यह पेन रात के समय रोशनी भी बिखेरेगा।
41 किलो वजनी इंक पेन की खासयित
इस स्कूल में पी.ई.टी.आई. नहीं है तो स्कूल में प्रार्थना सभा भी पेन करवाएगा। खाली पीरियड में पेन बच्चों को कहानी सुनाएगा। इस पेन से बच्चे गीत भी सुन सकते हैं। एक तरह से यह खोज शिक्षकों की कमी से निपटने में सहायक होगी। विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो, इसलिए ऐसा पेन तैयार किया गया है। यह पेन स्कूल में किसी भी शिक्षक के अनुपस्थित होने पर उस शिक्षक का विषय पढ़ा सकता है। गौर हो कि यह वही स्कूल है, जहां मिनी सिनेमाघर तैयार किया गया है। पिछले साल इस स्कूल में बच्चों की संख्या 64 थी। इस बार यहां 115 बच्चे पढ़ रहे हैं। स्कूल में की जा रही नई खोजों से बच्चों की इस स्कूल में रुचि बढ़ती जा रही है।
मुख्याध्यापक संजीव अत्री ने बताया कि पेन तैयार करने में 45,000 रुपये लागत आई है। इस पेन को बिजली या सौर ऊर्जा से चार्ज किया जा सकेगा। इसे तीन हिस्सों में बनाया है। पहला ढक्कन, दूसरा बीच का हिस्सा और तीसरे हिस्से में आठ इंच लंबी इसकी निब है, जिससे लिखा भी जा सकता है। ध्यान रहे यह वही मुख्य अध्यापक जी हैं जिन्होंने नाहन विधानसभा क्षेत्र के मोगिनंद स्कूल में पहली बार रेडियो स्टेशन लगवाया था।