केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय ने मंगलवार को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान को उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने की अधिसूचना जारी की। कानून और न्याय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक ट्वीट में कहा, "भारत के संविधान के तहत प्रावधानों के अनुसार, माननीय राष्ट्रपति ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के वरिष्ठतम उप-न्यायाधीश न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान को देश का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया है। वही उच्च न्यायालय 20.04.2023 से।"रिजिजू ने कहा, "मैं उन्हें अपनी शुभकामनाएं देता हूं।"
9 जनवरी, 1964 को रोहड़ू में जन्मे न्यायाधीश चौहान की शिमला के बिशप कॉटन स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा पूरी हुई। इस दौरान वह स्कूल के कैप्टन भी रहे। डीएवी कॉलेज, चंडीगढ़ से ऑनर्स के साथ स्नातक, पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ से कानून की डिग्री प्राप्त करने के बाद वह वर्ष 1989 में वकील बने व लाला छबील दास वरिष्ठ अधिवक्ता के प्रख्यात चैंबर में शामिल हुए। प्रदेश हाईकोर्ट में वकालत शुरू करते हुए कानून की सभी क्षेत्रों में महारत हासिल की
वह राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड व राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अलावा कई बोर्डों, निगमों, वित्तीय संस्थानों, सार्वजनिक और निजी कं पनियों, शैक्षिक संस्थानों और सहकारी समितियों व विभिन्न विभागों के कानूनी सलाहकार रहे। विभिन्न लोकअदालतों के सदस्य बने। हाईडल प्रोजैक्ट्स, रोप-वे, पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन, प्लास्टिक और तंबाकू उत्पादों पर प्रतिबंध, सॉलिड वेस्ट प्रबंधन परियोजनाओं के कार्यान्वयन और हिमाचल प्रदेश में सड़क निर्माण नीति के निर्धारण से संबंधित कई महत्वपूर्ण मामलों में सहयोग के लिए हाईकोर्ट द्वारा कोर्ट मित्र नियुक्त किए गए।
वह 23 फरवरी, 2014 को हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के बाद 30 नवम्बर, 2014 को हाईकोर्ट के स्थायी न्यायाधीश बनाए गए और आजतक के कार्यकाल के दौरान इन्होंने 41,600 मामलों का निपटारा कर दिया। जिनमें कई अहम व ऐतिहासिक निर्णय भी सुनाए गए। इन्होंने 5 मई, 2014 से हाईकोर्ट की जुवेनाइल जस्टिस कमेटी के अध्यक्ष रहते बाल-बालिका आश्रम, हिमाचल के अस्पताल, मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वसन शिमला और हिमाचल प्रदेश के वृद्धाश्रम के वृद्धों के कल्याण और हित के लिए कार्य किया। विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में भाग लेने के अलावा 21 फरवरी 2020 से 23 फरवरी, 2020 तक ‘न्यायपालिका और बदलती दुनिया’ विषय पर भारत के सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली में आयोजित सम्मेलन का हिस्सा रहे, जिसमें वह 3 उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों में से एक सदस्य थे।
वह 13 से 17 मई, 2019 तक रोमानिया में आयोजित ‘बच्चों के लिए देखभाल और सुरक्षा सेवाओं के सुधार’ पर ध्यान केंद्रित करने के साथ अंतर्राष्ट्रीय शिक्षण विनिमय कार्यक्रम का हिस्सा रहे। ये हाईकोर्ट से ऐसे पहले न्यायाधीश हैं जिन्होंने विदेशों में आयोजित किसी ऐसे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लिया है। ये 12 नवम्बर, 2016 से गवर्निंग काऊंसिल के और हिमाचल प्रदेश नैशनल लॉ यूनिवॢसटी, शिमला की कार्यकारी परिषद के सदस्य रहे। वह 18 नवम्बर, 2018 से 13 मार्च, 2020 तक न्यायिक अकादमी के अध्यक्ष रहे।