हिमाचल प्रदेश में पहली बार ऐसा हो रहा है कि कांग्रेस पार्टी को बहुमत मिलने के बाद नई सरकार के गठन का ताना बाना हाली लाज नहीं, बल्कि पार्टी कार्यालय राजीव भवन में शुक्रवार को बुना गया। यह व्यक्तिवाद से परे हटकर संगठन की बढती ताकत का एहसास कराता है। यही वजह है कि पार्टी अध्यक्ष प्रतिभा सिंह की दवाब की राजनीतिक संगठन की ताकत के आगे काम नहीं कर पाई, और नंबर गेम में भी प्रतिभा सिंह पिछडती चली गईं।
हिमाचल की राजनिति में हाली लाज का दबदबा रहा है। और कई मौकों पर सरकार यहां ही बनी है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह के निधन के बाद हालात बदले है। और प्रदेश में नये सीएम का निर्णय अब पार्टी आलाकमान ही करेगा। चुनाव जीतने के बाद प्रतिभा सिंह ने पूरा जोर लगाया और विधायक दल की बैठक से पहले दबाव की राजनीति के जरिये अपने आपको सीएम पद का दावेदार बताया। लेकिन लगता है कि प्रतिभा सिंह पर उनका दांव उल्टा पड गया और हालात ऐसे बने कि उनके मंसूबों पर पानी फिर गया।
दरअसल , विधायक दल की बैठक से पहले ही भले ही शिमला की सड़कों पर वीरभद्र सिंह समर्थक बवाल काटने लगे और खुद प्रतिभा सिंह ने मीडिया में आकर बार बार एहसास कराया , कि वहीं सबसे ताकतवर हैं। लेकिन राजनीति ने उस समय पासा पलटा, जब बैठक से पहले करीब 21 विधायक पार्टी के पूर्व अध्यक्ष सुखविन्दर सिंह सुक्खू के साथ हो गये। और उन्होंने सोलन में बाकायदा बैठक कर संदेश दे दिया कि वह प्रतिभा सिंह के साथ है। हालांकि इससे पहले विधायक दल की बैठक मोहाली में होनी थी। जिसे बाद में शिमला शिफ्ट किया गया। जब विधायक शिमला पहुंचे ही नहीं, तो तीन बार बैठक का समय बदलना पडा।
लेकिन इस बीच घटे घटनाक्रम से पार्टी आलाकमान सचेत हो गया और निर्णय लिया गया कि सबसे पहले राजभवन जाकर सरकार बनाने का दावा पेश किया जाये। इस दौरान प्रतिभा सिंह अपनी ताकत नहीं दिखा पाईं। हेलीपैड पर जब छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल के साथ राजीव शुक्ला और भूपेंद्र सिंह हुड्डा उतरे, तो उस दौरान स्वागत करने वालों में प्रतिभा सिंह समर्थक विधायक नदारद रहे। जिससे प्रतिभा सिंह का दावा कमजोर पड़ने लगा। उसके बाद सिसिल होटल में बैठक के दौरान ही पार्टी आलाकमान से मिले संदेश के बारे में तीनों नेताओं ने प्रतिभा सिंह को अवगत कराया तो हालात बदल गये। तय कर लिया गया था, कि राजभवन में गवर्नर से मिलकर सरकार बनाने का दावा कांग्रेस पेश करेगी। कांग्रेस आलाकमान ने पहले ही पूरी तैयारी कर ली थी। जिसकी कानों कान भनक प्रतिभा सिंह को नहीं लग पाई। गवर्नर से मिलने का समय पहले ही ले लिया गया। यह सब देखकर प्रतिभा सिंह हैरान रह गईं। यही वजह रही कि राजभवन जाते समय प्रतिभा सिंह ने सिसिल होटल से बीच रास्ते में ही अपने काफिले को हाली लाज की ओर मोड लिया। और वह राजभवन नहीं गईं।
कांग्रेस के सरकार बनाने का दावा पेश करने की भनक लगते ही शिमला में हालात बदल गये, सोलन में रुके सुक्खू समर्थक विधायकों ने शिमला की राह पकड़ ली। इस दौरान मुकेश अग्निहोत्री भी उनके पीछे शिमला आ गये। तब तक स्पष्ट हो गया था , कि ज्यादातर विधायक प्रतिभा सिंह के साथ नहीं, बल्कि सुखविंदर सिंह सुक्खू के साथ है। कई विधायकों ने हाली लाज पहुंचने से गुरेज किया, जिससे प्रतिभा का दावा कमजोर पड गया। हालात ऐसे बने कि चालीस में से 21 विधायक सुक्खू के साथ आ गये तो करीब दस विधायकों ने अपने आपको तटस्थ कर लिया।
प्रतिभा सिंह का दावा उसी सूरत में मजबूत हो सकता था , जब कम से कम 14 विधायक उनके साथ आते। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। अगर 14 विधायक उनके साथ आ जाते तो वह पार्टी पर दबाव बनाने में कामयाब हो सकती थी।