हिमालयी क्षेत्र में हर मौसम में संपर्क सुविधा और रणनीतिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में बीआरओ की भूमिका से कराया अवगत
रोहतांग, कुल्लू (हिमाचल प्रदेश), 1 सितंबर 2026 । पश्चिम बंगाल के राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मीडिया संस्थानों के 10 पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के प्रोजेक्ट योजक का दौरा किया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल को हिमालयी क्षेत्र में उच्च ऊंचाई वाले बुनियादी ढांचे के विकास एवं रखरखाव तथा पूरे वर्ष संपर्क सुविधा सुनिश्चित करने में प्रोजेक्ट योजक की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
बीआरओ के अधिकारियों ने मीडिया प्रतिनिधियों को प्रोजेक्ट योजक के संचालन और कार्यों से अवगत कराते हुए बताया कि परियोजना के तहत 10,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित विश्व की सबसे लंबी राजमार्ग सुरंग के रखरखाव के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण रणनीतिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का निर्माण किया जा रहा है। अटल टनल के निर्माण के बाद प्रोजेक्ट योजक की स्थापना की गई थी।
प्रतिनिधिमंडल को बताया गया कि अत्यधिक चुनौतीपूर्ण मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद बीआरओ के जवान और इंजीनियर मनाली-केलांग-लेह अक्ष को पूरे वर्ष चालू रखने के लिए निरंतर कार्य करते हैं। इस क्षेत्र में भारी बर्फबारी के दौरान तापमान माइनस 30 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। ऐसी विषम परिस्थितियों में भी बीआरओ कर्मी सड़क एवं अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के रखरखाव में जुटे रहते हैं।
मीडिया प्रतिनिधिमंडल को निम्मू-पदुम-दरचा (एनपीडी) अक्ष और निर्माणाधीन 4.1 किलोमीटर लंबी शिंकू ला सुरंग के बारे में भी जानकारी दी गई। इसके पूरा होने पर जांस्कर घाटी के रास्ते लद्दाख के लिए यह तीसरा हर मौसम में उपयोगी मार्ग उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे लाहौल-स्पीति के दूरदराज के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी। बेहतर संपर्क सुविधा से क्षेत्र में पर्यटन, व्यापार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
बीआरओ अधिकारियों ने मौसम संबंधी आपात स्थितियों के दौरान संगठन की त्वरित प्रतिक्रिया और राहत कार्यों की जानकारी भी साझा की। मार्च 2026 में अटल टनल के दक्षिणी पोर्टल के निकट भारी बर्फबारी के कारण 200 से अधिक वाहन फंस गए थे। बीआरओ ने पुलिस और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय कर बचाव एवं सड़क साफ करने का अभियान चलाया और लगभग सभी फंसे हुए वाहनों को 12 घंटे के भीतर सुरक्षित निकाल लिया।
इसी तरह पिछले वर्ष आई अचानक बाढ़ के दौरान मनाली-केलांग राजमार्ग का एक क्षतिग्रस्त हिस्सा बीआरओ के इंजीनियरों ने 12 घंटे से भी कम समय में बहाल कर दिया था। इससे इस महत्वपूर्ण मार्ग पर यातायात में होने वाले व्यवधान को न्यूनतम रखने में मदद मिली।
मीडिया प्रतिनिधिमंडल का यह दौरा हिमालयी क्षेत्र में रणनीतिक सीमा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और दुर्गम एवं सामरिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हर मौसम में विश्वसनीय संपर्क सुविधा सुनिश्चित करने के लिए बीआरओ द्वारा किए जा रहे निरंतर प्रयासों को करीब से समझने का अवसर बना।