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आषाढ़ गुप्त नवरात्रि | आषाढ़ गुप्त नवरात्रि कल से आरंभ, नौ दिनों तक होगी आदिशक्ति मां दुर्गा की विशेष आराधना

Updated on Tuesday, July 14, 2026 17:59 PM IST

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से शुरू, नौ दिनों तक होगी मां दुर्गा और दस महाविद्याओं की विशेष आराधना

धर्म डेस्क। सनातन धर्म में शक्ति उपासना के सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में से एक आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ 15 जुलाई 2026, बुधवार से होगा। नौ दिनों तक चलने वाली इस पावन नवरात्रि में श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के साथ-साथ दस महाविद्याओं की भी विशेष पूजा-अर्चना करेंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार गुप्त नवरात्रि साधना, मंत्र-जाप, ध्यान और देवी आराधना का विशेष काल माना जाता है। इन दिनों में की गई उपासना से आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और देवी कृपा की प्राप्ति होती है।

चैत्र और शारदीय नवरात्रि की तरह आषाढ़ गुप्त नवरात्रि भी मां भगवती की आराधना का पर्व है, लेकिन इसका स्वरूप अपेक्षाकृत अधिक आध्यात्मिक माना जाता है। शाक्त परंपरा के अनुसार इन नौ दिनों में देवी के नौ स्वरूपों के साथ दस महाविद्याओं की साधना का भी विशेष महत्व है। देशभर के शक्तिपीठों, देवी मंदिरों तथा साधना केंद्रों में इस दौरान विशेष पूजा-अर्चना, दुर्गा सप्तशती का पाठ, हवन, मंत्र-जाप और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं।

पहले दिन होगी कलश स्थापना

गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ कलश स्थापना के साथ होगा। श्रद्धालु प्रातःकाल शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित कर अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित करेंगे तथा मां शैलपुत्री का पूजन करेंगे। इसके बाद प्रतिदिन मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा, दुर्गा सप्तशती, देवी कवच, सिद्ध कुंजिका स्तोत्र और अन्य देवी मंत्रों का जाप किया जाएगा।

नौ दिनों तक दस महाविद्याओं की साधना

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार गुप्त नवरात्रि में माता दुर्गा की आराधना के साथ दस महाविद्याओं की पूजा का भी विशेष विधान है। शाक्त और तांत्रिक परंपरा में इन महाविद्याओं को आदिशक्ति के दस दिव्य स्वरूप माना गया है। श्रद्धालु अपनी परंपरा और गुरु के मार्गदर्शन के अनुसार इनकी उपासना करते हैं।

नौ दिनों का पूजन क्रम

15 जुलाई (प्रतिपदा)
मां शैलपुत्री के साथ मां काली की पूजा की जाएगी। मां काली को समय, शक्ति और दुष्ट शक्तियों के विनाश की अधिष्ठात्री माना जाता है।

16 जुलाई (द्वितीया)
मां ब्रह्मचारिणी के साथ मां तारा की आराधना होगी। मां तारा को ज्ञान, संरक्षण और संकटों से मुक्ति प्रदान करने वाली देवी माना गया है।

17 जुलाई (तृतीया)
मां चंद्रघंटा एवं मां कूष्मांडा की पूजा के साथ मां त्रिपुर सुंदरी (षोडशी) की उपासना की जाएगी। यह दिन सौंदर्य, ज्ञान और दिव्य चेतना का प्रतीक माना जाता है।

18 जुलाई (चतुर्थी)
मां स्कंदमाता के साथ मां भुवनेश्वरी की पूजा होगी। मां भुवनेश्वरी को समस्त ब्रह्मांड की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है।

19 जुलाई (पंचमी)
मां कात्यायनी के साथ मां छिन्नमस्ता की आराधना का विधान है। यह स्वरूप त्याग, आत्मबल और आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक माना जाता है।

20 जुलाई (षष्ठी)
मां कालरात्रि के साथ मां धूमावती की पूजा की जाएगी। धार्मिक मान्यता है कि इनकी उपासना से भय, बाधाओं और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।
21 जुलाई (दुर्गा अष्टमी)
मां महागौरी के साथ मां बगलामुखी की विशेष आराधना होगी। बगलामुखी देवी को शत्रु बाधा, न्यायिक विवाद और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है।

22 जुलाई (महानवमी)
मां सिद्धिदात्री के साथ मां मातंगी की पूजा की जाएगी। मां मातंगी को ज्ञान, वाणी, संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी माना गया है।

23 जुलाई (पारण दिवस)
गुप्त नवरात्रि के समापन पर मां कमला की पूजा के साथ व्रत का पारण किया जाएगा। मां कमला को धन, ऐश्वर्य, समृद्धि और सुख-शांति प्रदान करने वाली देवी माना जाता है।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान

गुप्त नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं को सात्विक भोजन करना चाहिए तथा मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज जैसे तामसिक पदार्थों से परहेज करना चाहिए। नियमित रूप से मां दुर्गा की आरती, दुर्गा सप्तशती का पाठ, मंत्र-जाप तथा देवी का ध्यान करना शुभ माना जाता है। संयम, सदाचार और सेवा भाव के साथ की गई उपासना को विशेष फलदायी माना गया है।
धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता है कि आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के दौरान श्रद्धा और विधि-विधान से मां दुर्गा एवं दस महाविद्याओं की उपासना करने से साधक को आध्यात्मिक शक्ति, सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास, मानसिक शांति और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसी कारण इस पर्व का विशेष महत्व साधकों के साथ-साथ सामान्य श्रद्धालुओं के बीच भी लगातार बढ़ रहा है।

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