बड़ा भंगाल के बाशिंदों के लिए किसी सौगात से कम नहीं रहा सीएम प्रवास
जगी उम्मीदों की लौ, बड़ा भंगाल वासियों के चेहरे पर लौटी मुस्कान
धर्मशाला 29 जून। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खु के हिमाचल के दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों के लिए विकास के नए संकल्पों, जन जीवन को बेहतर बनाने के सार्थक प्रयासों ने ग्रामीणों के आगे बढ़ने के लिए राहें खोल दी हैं। बड़ा भंगाल के बाशिंदों के लिए सीएम का प्रवास किसी सौगात से कम नहीं रहा उनके चेहरों पर खुशी देखते ही बनती है। स्थानीय निवासी कमलो देवी की आंखों में एक नई चमक थी। वह कहती हैं, वर्षों से हम सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं, अब मुख्यमंत्री जी खुद चलकर आए हैं, तो उम्मीद बंधी है कि हमारे दिन भी बहुरेंगे। वहीं, रिशू राम के लिए तो यह किसी अचरज से कम नहीं था। उन्होंने कहा, आज तक कोई मुख्यमंत्री हमारे यहां रात रुकने नहीं आया। सुक्खू जी पहले मुख्यमंत्री हैं। अब लगता है कि हमारी समस्याओं का निराकरण होगा। संतोष कुमारी भी इस बात से गदगद नजर आईं कि उनकी ओर से बताई गई समस्याओं पर मुख्यमंत्री ने तुरंत अधिकारियों को समाधान के निर्देश दिए।
बड़ा भंगाल की पगडंडियों पर जब मुख्यमंत्री लोगों के बीच पहुंचे, तो उनके शब्द थे- मैं यहां राजनीति करने नहीं, बल्कि आपका दुख-दर्द बांटने आया हूं। इन शब्दों ने सीधे वहां के बाशिंदों के दिलों को छुआ। मुख्यमंत्री का यह कथन उनके ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के नारे को कागजों से निकालकर धरातल पर उतारता है। दुर्गम इलाकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की यह पहल बताती है कि सरकार की नजरों में प्रदेश का हर नागरिक समान अहमियत रखता है।
दरअसल, बड़ा भंगाल कोई इकलौता उदाहरण नहीं है। इससे पहले डोडरा-क्वार, कुपवी, कुल्लू के बागा सराहन और बंजार के सरची जैसे अति-कठिन इलाकों में भी मुख्यमंत्री रात गुजार चुके हैं। मुख्यमंत्री ने अपने प्रवास के दौरान सड़क निर्माण के लिए दस करोड़, विद्युत व्यवस्था के लिए दो डीजल जनरेटर, बच्चों के शैक्षणिक सत्र के बाद हेली टैक्सी की सुविधा, बीड़ में छात्रों के लिए हाॅस्टल बनाने का आश्वासन, जनजातीय दर्जा देने के लिए प्रयास, महिलाओं के लिए 1500 रूपये की मासिक राशि, महिला मंडलों को दो-दो लाख, युवक मंडल के लिए एक लाख तथा राजमाह की ब्रांडिंग तथा प्राकृतिक गांव तथा इको टूरिज्म के लिए दो हेक्टेयर भूमि चिह्न्ति करने के निर्देश भी दिए हैं।
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