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शिमला | डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए प्रेरणास्रोत : संजीव कटवाल

Updated on Tuesday, June 23, 2026 15:31 PM IST

राष्ट्र प्रथम की भावना के लिए जीवन समर्पित करने वाले महान राष्ट्रनायक थे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी

शिमला। भारतीय जनता पार्टी प्रदेश मुख्यालय दीपकमल, चक्कर में आज भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक एवं महान शिक्षाविद् डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित भाजपा नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश महामंत्री संजीव कटवाल, प्रदेश कोषाध्यक्ष कमलजीत सूद, पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज, केशव चौहान, शांता कुमार, राजू ठाकुर सहित अनेक भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

इस अवसर पर भाजपा प्रदेश महामंत्री संजीव कटवाल ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्रभक्ति, त्याग, समर्पण और राष्ट्रीय एकता के लिए संघर्ष का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र की सेवा और भारत की अखंडता को सुदृढ़ करने के लिए समर्पित कर दिया। उनका बलिदान भारतीय लोकतंत्र और राष्ट्रीय एकता के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है।

संजीव कटवाल ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने उस समय जम्मू-कश्मीर में लागू दो विधान, दो प्रधान और दो निशान की व्यवस्था का पुरजोर विरोध किया था। उनका स्पष्ट मत था कि एक देश में दो संविधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चल सकते। इसी राष्ट्रीय संकल्प को लेकर उन्होंने संघर्ष किया और राष्ट्र की एकता एवं अखंडता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।

उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का बलिदान ही वह प्रेरणा बना जिसने आगे चलकर भारतीय जनता पार्टी और करोड़ों राष्ट्रभक्तों को जम्मू-कश्मीर के पूर्ण एकीकरण के लिए संघर्ष करने की शक्ति प्रदान की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अनुच्छेद 370 और 35A को हटाकर डॉ. मुखर्जी के सपनों को साकार किया गया और जम्मू-कश्मीर को देश की मुख्यधारा से पूर्ण रूप से जोड़ा गया।

संजीव कटवाल ने कहा कि डॉ. मुखर्जी केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि एक महान शिक्षाविद्, विचारक और राष्ट्रनिर्माता भी थे। वे सबसे कम आयु में कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बने और उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका मानना था कि राष्ट्र का विकास सांस्कृतिक मूल्यों, शिक्षा और राष्ट्रीय चेतना के आधार पर ही संभव है।

उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि युवा पीढ़ी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन, संघर्ष और आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाए। उनका जीवन हमें यह संदेश देता है कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है और देश की एकता, अखंडता तथा स्वाभिमान के लिए किसी भी त्याग से पीछे नहीं हटना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित कार्यकर्ताओं ने डॉ. मुखर्जी के राष्ट्रवादी विचारों को जन-जन तक पहुंचाने तथा उनके आदर्शों के अनुरूप कार्य करने का संकल्प लिया।

श्रद्धांजलि सभा का समापन डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए और उनके बताए मार्ग पर चलने के संकल्प के साथ हुआ।

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