भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल।
1 मई 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दिन वैशाख शुक्ल पक्ष पूर्णिमा होने के कारण बुद्ध पूर्णिमा, कूर्म जयंती और सत्यनारायण व्रत जैसे प्रमुख पर्व मनाए जा रहे हैं। यह दिन स्नान, दान, पूजा-पाठ और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।
हिन्दू पंचांग के अनुसार आज शुक्रवार है। सूर्य उत्तरायण, उत्तर गोल, वसंत ऋतु। शक संवत 1948 , विक्रमी संवत 2083, वैशाख शुक्ल पूर्णिमा तिथि , 1 मई 2026 ।
पंचांग विवरण (1 मई 2026)
वार: शुक्रवार
विक्रम संवत: 2083
शक संवत: 1948सं
मास: वैशाख
तिथि: वैशाख शुक्ल पूर्णिमा — रात 10:52 बजे तक, इसके बाद कृष्ण पक्ष प्रतिपदा
नक्षत्र: स्वाती — 2 मई सुबह 4:35 बजे तक
योग: सिद्धि योग
करण: विष्टि (भद्रा) के बाद बाव
सूर्योदय और चंद्र स्थिति
सूर्योदय: सुबह 5:40–5:57 बजे (स्थान अनुसार)
सूर्यास्त: शाम 6:50–6:56 बजे
चंद्रोदय: शाम लगभग 6:44 बजे (पूर्णिमा का पूर्ण चंद्र दर्शन)
शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 11 बजकर 52 मिनट से 12 बजकर 45 मिनट तक।
अमृत काल शाम 06 बजकर 56 मिनट से रात 08 बजकर 41 मिनट तक।
ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 12 मिनट से 4 बजकर 56 मिनट तक।
अशुभ मुहूर्त
राहुकाल: सुबह 10:47 से 12:24 तक
यमगंड काल: दोपहर 3:37 से 5:13 तक
गुलिक काल: सुबह 7:34 से 9:10 तक
प्रमुख पर्व और व्रत
बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Jayanti) — भगवान गौतम बुद्ध की जयंती
वैशाख पूर्णिमा व्रत
कूर्म जयंती — भगवान कूर्म अवतार का अवतरण दिवस
सत्यनारायण व्रत और पूजा
चित्रा पूर्णिमा / चंदिका जयंती
इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
विशेष महत्व
वैशाख पूर्णिमा को सनातन धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन किया गया स्नान, दान और जप कई गुना फल देता है। साथ ही यह दिन बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए भी अत्यंत पवित्र है।
वैशाख पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु के द्वितीय अवतार 'कूर्म' की जयंती मनाई जाती है। समुद्र मंथन के समय जब मंदराचल पर्वत डूबने लगा था, तब श्रीहरि ने कछुए का रूप धारण कर उसे अपनी पीठ पर संभाला था। यह अवतार धैर्य और स्थिरता का प्रतीक है। कूर्म जयंती पर पूजन करने से जीवन में स्थिरता आती है और रुके हुए कार्य सिद्ध होते हैं।
कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।