मिडिल ईस्ट में Iran और Israel के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को युद्ध की स्थिति में ला खड़ा किया है। अमेरिका के समर्थन के साथ इज़राइल द्वारा किए गए हवाई हमलों के बाद हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। इस संघर्ष ने अब व्यापक क्षेत्रीय संकट का रूप ले लिया है और कई देशों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
रिपोर्टों के अनुसार, इज़राइल और United States की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के तहत ईरान के कई सैन्य ठिकानों, मिसाइल बेस और रणनीतिक स्थानों को निशाना बनाया गया है। इन हमलों में कई सैन्य प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचा है और बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। ईरान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता पर हमला बताते हुए कड़ा विरोध जताया है।
इस बीच ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें सामने आई हैं, जिनका निशाना खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने बताए जा रहे हैं। कई मिसाइलों को एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही नष्ट कर दिया, लेकिन पूरे क्षेत्र में तनाव और असुरक्षा का माहौल बन गया है।
तनाव बढ़ने के बाद खाड़ी के कई देशों ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। Saudi Arabia, Qatar, Kuwait और United Arab Emirates में सैन्य ठिकानों और प्रमुख शहरों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। कई जगहों पर एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए हैं और नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
इसी दौरान Dubai में एक घटना ने चिंता और बढ़ा दी। यहां इंटरसेप्ट की गई एक मिसाइल का मलबा सड़क पर गिर गया, जिससे एक व्यक्ति की मौत हो गई। इस घटना के बाद खाड़ी देशों में युद्ध का खतरा और स्पष्ट दिखाई देने लगा है।
इस संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। खासकर तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक Strait of Hormuz के आसपास तनाव बढ़ने से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हालात और बिगड़ते हैं तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है।
इस बीच United Nations समेत कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान निकालने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि अगर यह संघर्ष जल्द नहीं रुका तो यह पूरे मिडिल ईस्ट में बड़े युद्ध का रूप ले सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकट केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक प्रभाव वाला है। यदि युद्ध और फैलता है तो इसका असर तेल बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक सुरक्षा पर गंभीर रूप से पड़ सकता है। दुनिया के कई देश स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं और अपने नागरिकों के लिए सुरक्षा सलाह जारी कर रहे हैं।