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शिमला | नौनिहालों के बेहतर स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा को प्रदेश सरकार दे रही है प्राथमिकता

Updated on Sunday, March 01, 2026 15:41 PM IST

नौनिहालों के बेहतर स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा को प्रदेश सरकार दे रही है प्राथमिकता
सक्षम आंगनवाड़ी केन्द्रों मंे बच्चों की पोषण जरूरतों का रखा जा रहा ख्याल
किचन गार्डन पहल से बच्चों को मिल रहा पौष्टिक आहार

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के दूरदर्शी नेतृत्व में वर्तमान राज्य सरकार ने बाल्यावस्था देखभाल और बच्चों के समग्र विकास को केन्द्र में रखकर अनेक नीतिगत कदम उठाए हैं। पोषण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समावेशी विकास पर विशेष बल देते हुए सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि प्रदेश में प्रत्येक बच्चे का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो और उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर मिले।

नौनिहालों की पोषण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सरकार ने अनेक ठोस कदम उठाए हैं ताकि बच्चों का संतुलित विकास सुनिश्चित किया जा सके। प्रदेश भर में संचालित हो रहे 18,925 आंगनवाड़ी केंद्र बच्चों के मजबूत भविष्य का निर्माण कर रहे हैं। इन केन्द्रों द्वारा छह वर्ष तक की आयु के बच्चों के स्वास्थ्य मानकों का मूल्यांकन किया जाता है ताकि बच्चे का समुचित शारीरिक और मानसिक विकास सुनिश्चित किया जा सके। इस वित्त वर्ष में आंगनवाड़ी सेवा योजना के तहत 113 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं। वर्तमान वित्त वर्ष में विशेष पोषाहार कार्यक्रम के तहत 1516.09 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से बाल्यकाल देखभाल के साथ औपचारिक स्कूली शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश सरकार ने सभी आंगनवाड़ी केंद्रों को आंगनवाड़ी सह-स्कूल घोषित किया है। इससे उनकी प्रारम्भिक शिक्षा की मजबूत नींव तैयार होगी। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय एवं शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आंगनवाड़ी केंद्रों एवं विद्यालयों के को-लोकेशन के लिए जारी दिशा-निर्देशों को अमल में लाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय संयुक्त कमेटी का गठन किया जा चुका है।

प्रदेश के लिए स्वीकृत 1030 सक्षम आंगनवाड़ी केंद्रों में से जिला चम्बा के लिए 100 आंगनवाड़ी केंद्र स्वीकृत किये गए हैं। प्रदेश में आंगनवाड़ी केंद्रों में स्तरोन्नत करने की प्रक्रिया जारी है। राज्य के सभी जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी व सुपरवाइजर को स्टेट लेवल मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने सभी सरकारी स्कूलों के बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाने के लिए मुख्यमंत्री बाल पोषण आहार योजना शुरू की है। योजना के तहत राज्य के 15,181 सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे 5.34 लाख से अधिक छात्रों को पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाया जा रहा है।

बच्चों के पोषण स्तर में सुधार के लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्कूलों में किचन गार्डन पहल को सफलतापूर्वक लागू किया जा रहा है। प्रदेश के 14 हजार 464 विद्यालयों में मिड-डे-मील कार्यकर्त्ताओं, स्कूल प्रबन्धन समिति, स्कूल स्टाफ और विद्यार्थियों की मदद से किचन गार्डन तैयार किए गए हैं। इन किचन गार्डन में मौसमी सब्जियां उगाई जाती हैं। विद्यालयों के परिसरों के साथ-साथ सीमित स्थानों वाले स्कूलों में बड़े कंटेनर, पोट्स और बाल्टियों में सब्जियां और जड़ी-बूटियां उगाई जाती हैं। किचन गार्डन में उगाई गई सब्जियों का उपयोग मिड-डे-मील बनाने में किया जा रहा है। इसके साथ-साथ बच्चों को प्राकृतिक खेती से तैयार उत्पादों के महत्त्व के बारे में भी अवगत करवाया जाता है। इस प्रयास से मिड-डे-मील के माध्यम से बच्चों की पोषण आवश्यकताओं की पूर्ति होने के साथ-साथ बच्चे खेती के प्रति भी जागरूक हो रहे हैं।

स्कूलों में कार्यरत मिड-डे-मील कार्यकर्ता बच्चों की पोषण आवश्यकताओं को पूरा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने मिड-डे-मील कार्यकताओं के मानदेय में 500 रुपये की बढ़ोतरी की है। इससे 21,115 मिड-डे-मील वर्कर्स लाभान्वित होंगे और अब उनको 5000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा।

पोषणयुक्त आहार हर बच्चे का अधिकार है। संतुलित आहार बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य को आकार देने के साथ-साथ उन्हें मानसिक और भावनात्मक रूप से भी मजबूत करता है। प्रदेश सरकार ने बच्चों को पोषणयुक्त भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी नीतियां और योजनाएं शुरू की हैं। इनके फलस्वरूप एक खुशहाल बचपन का निर्माण हो रहा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, उचित पोषण बेहतर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली, गैर-संचारी रोगों के कम जोखिम और स्वस्थ जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है। हिमाचल प्रदेश सरकार के प्रयास विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुरूप है।

हिमाचल प्रदेश का भविष्य उसके बच्चों के कल्याण में निहित है। मुख्यमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में राज्य न केवल अपने नन्हे-मुन्हें बच्चों की पोषण आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित कर रहा है बल्कि एक स्वस्थ, खुशहाल और उज्ज्वल हिमाचल का निर्माण कर रहा है।

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