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शिमला | रिकॉर्ड केंद्रीय सहायता के बावजूद विकास ठप — सरकारी आंकड़ों ने खोली वास्तविक स्थिति : बिंदल

Updated on Saturday, February 14, 2026 13:42 PM IST

रिकॉर्ड केंद्रीय सहायता के बावजूद विकास ठप — सरकारी आंकड़ों ने खोली वास्तविक स्थिति : बिंदल

“सर्वदलीय बैठक की गंभीरता संदिग्ध — सत्तारूढ़ दल के प्रमुख नेता ही रहे अनुपस्थित”

“वित्त आयोग, टैक्स डिवोल्यूशन और केंद्रीय योजनाओं से ऐतिहासिक सहयोग — फिर भी संकट का शोर क्यों?”

“प्रदेश की आर्थिक अव्यवस्था की जिम्मेदार राज्य सरकार — दोषारोपण की राजनीति से नहीं छिपेगी सच्चाई”


शिमला। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में लगभग 40 महीनों से सत्ता में बैठी कांग्रेस सरकार प्रशासनिक अक्षमता, वित्तीय कुप्रबंधन और विकास की सुस्ती को छिपाने के लिए लगातार केंद्र सरकार और पूर्व भाजपा सरकारों पर दोषारोपण की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता अब समझ चुकी है कि वास्तविक समस्या वित्तीय संसाधनों की कमी नहीं बल्कि संसाधनों के सही उपयोग की कमी है।

उन्होंने कहा कि हाल ही में आयोजित सर्वदलीय बैठक को समाधान का मंच बताने की कोशिश की गई, जबकि वास्तविकता यह है कि बैठक की गंभीरता स्वयं सरकार ने कम कर दी। सत्तारूढ़ दल के प्रदेश अध्यक्ष उपस्थित नहीं थे, उपमुख्यमंत्री और संबंधित विभागीय मंत्री को आमंत्रित नहीं किया गया, जिससे स्पष्ट है कि बैठक का उद्देश्य सर्वसम्मति नहीं बल्कि राजनीतिक वातावरण बनाना था।

डॉ. बिंदल ने कहा कि बैठक में प्रस्तुत वित्त विभाग की आधिकारिक प्रस्तुति के अनुसार हिमाचल प्रदेश को केंद्रीय करों में हिस्सा बढ़ाकर लगभग 0.830% से 0.914% कर दिया गया है, जिसके परिणामस्वरूप वर्ष 2026 में प्रदेश को लगभग ₹13,950 करोड़ प्राप्त होंगे, जो पिछले वर्ष से लगभग ₹2,450 करोड़ अधिक हैं। इसके अतिरिक्त ग्रामीण व शहरी विकास मद में लगभग ₹4,179 करोड़ तथा SDRF और DMF मद में लगभग ₹2,682 करोड़ मिलने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े किसी राजनीतिक दल के नहीं बल्कि राज्य सरकार के अपने दस्तावेजों के हैं।

उन्होंने वित्त आयोग के ऐतिहासिक आंकड़ों की तुलना करते हुए बताया कि
छठा वित्त आयोग (1974–79) में ₹161 करोड़
11वां वित्त आयोग (2001–05) में ₹1,979 करोड़
12वां वित्त आयोग में ₹10,202 करोड़
13वां वित्त आयोग में ₹7,889 करोड़
जबकि केंद्र में वर्तमान शासनकाल के दौरान
14वां वित्त आयोग में लगभग ₹40,624 करोड़
15वां वित्त आयोग में लगभग ₹48,000 करोड़
की सहायता प्रदेश को मिली। उन्होंने कहा कि यह तुलना स्पष्ट करती है कि वर्तमान समय में हिमाचल को पूर्ववर्ती वर्षों की तुलना में कई गुना अधिक संसाधन प्राप्त हुए हैं।

राजस्व घाटा अनुदान (RDG) के संदर्भ में उन्होंने बताया कि वर्ष 2004 से 2014 के बीच लगभग ₹18,091 करोड़ मिले, जबकि 2015 से 2025 के बीच यह राशि बढ़कर लगभग ₹89,254 करोड़ हो गई। उन्होंने कहा कि केवल वर्तमान राज्य सरकार के साढ़े तीन वर्ष के कार्यकाल में ही लगभग ₹27,000 करोड़ विभिन्न मदों में प्राप्त हुए, फिर भी राज्य सरकार वित्तीय संकट का वातावरण बना रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि पर्याप्त वित्तीय सहायता मिलने के बावजूद प्रदेश में कई संस्थान बंद किए गए, कर्मचारियों के भत्ते और पेंशन भुगतान में देरी हुई, जनहित योजनाएँ सीमित की गईं और टैक्स बढ़ाकर आम जनता पर आर्थिक बोझ डाला गया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सीमेंट, डीजल, स्टाम्प ड्यूटी, बस किराये और बिजली दरों में बढ़ोतरी ने सीधे तौर पर आम नागरिक के खर्च को प्रभावित किया है।

डॉ. बिंदल ने राज्य के राजकोषीय आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार राज्य की कुल आय लगभग ₹42,000 करोड़ और व्यय लगभग ₹48,000 करोड़ है, यानी लगभग ₹6,000 करोड़ का अंतर है। उन्होंने कहा कि आगामी वित्तीय वर्ष में राज्य की आय बढ़कर लगभग ₹26,600 करोड़ होने का अनुमान है, जिससे यह अंतर स्वतः कम हो सकता है। ऐसे में वित्तीय आपातस्थिति जैसा माहौल बनाना तथ्यों से परे है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं, केंद्रीय प्रायोजित परियोजनाओं, टैक्स डिवोल्यूशन, विश्व बैंक सहायता, नाबार्ड फंडिंग, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना तथा अन्य अवसंरचना योजनाओं सहित प्रदेश को लगभग ₹2.12 लाख करोड़ की कुल सहायता प्राप्त हुई है। इसके अतिरिक्त लगभग ₹46,000 करोड़ की लागत से राष्ट्रीय राजमार्ग और फोरलेन परियोजनाएँ चल रही हैं तथा लगभग ₹6,000 करोड़ राष्ट्रीय राजमार्ग रखरखाव पर खर्च किए जा रहे हैं। सीमा सड़क संगठन की परियोजनाएँ इससे अलग हैं।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर अवसंरचना के लिए ₹12.2 लाख करोड़ का बजट प्रावधान किया है, जिसका लाभ हिमाचल प्रदेश पर्यटन, उद्योग, सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करके उठा सकता है। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह राजनीतिक आरोपों की बजाय परियोजनाओं की तैयारी, निवेश आकर्षण और प्रशासनिक दक्षता पर ध्यान दे।

अंत में डॉ. बिंदल ने कहा कि भाजपा हमेशा प्रदेश हित को सर्वोपरि मानती है और आगे भी हिमाचल के आर्थिक सशक्तिकरण, पारदर्शी प्रशासन और तेज विकास के लिए हर स्तर पर रचनात्मक सहयोग और जनहित की आवाज उठाती रहेगी।

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