जिला कांगड़ा में कृषि उद्यमिता को नई दिशा — नाबार्ड द्वारा एसीएबीसी योजना पर विशेष कार्यशाला का आयोजन
हिमाचल में 431 युवा प्रशिक्षित, 112 सफल कृषि उद्यम स्थापित — नए अवसरों पर विस्तृत चर्चा
पालमपुर, 28 नवम्बर 2025 कृषि स्नातकों और ग्रामीण युवाओं को कृषि–आधारित उद्यम स्थापित करने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से नाबार्ड, कांगड़ा ने आज पालमपुर मेंएग्री–क्लीनिक्स एवं एग्री–बिज़नेस सेंटर्स (ACABC)योजना पर एक महत्वपूर्ण जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की।
इस कार्यक्रम ने कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देने के प्रदेशव्यापी प्रयासों को नई ऊर्जा दी। उल्लेखनीय है किहिमाचल प्रदेश में इस योजना के तहत अब तक 431 युवा कृषि स्नातकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है और 112 उद्यम सफलतापूर्वक स्थापित हो चुके हैं, जो कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और नवाचार की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।
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कार्यक्रम में प्रमुख अधिकारियों की भागीदारी
कार्यशाला में जिले के विभिन्न विभागों व बैंकों से महत्वपूर्ण अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें शामिल हैं—
1. पीएनबी, ऊको बैंक,एचपीजीबी, केसीसीबी, केपीएआरडीबी एवं इंडियन बैंकके वरिष्ठ बैंक अधिकारी
2. श्री अभिनव सूद, उपनिदेशक कृषि कार्यालय, कांगड़ा
3. डॉ. संजय शर्मा, प्रभारी, केवीके कांगड़ा
4. डॉ. संजीव कुमार सांडल,सीएसकेएचपीकेवी, पालमपुर
5. जिले केकई सक्रिय कृषि–उद्यमी
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एसीएबीसी योजना—ग्रामीण युवाओं के लिए सुनहरा अवसर
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया कि एसीएबीसी योजना का उद्देश्य कृषि और संबंधित विषयों के स्नातकों कोसफल कृषि–उद्यमीबनाना है। इसमें—
• 45 दिनों का निःशुल्क आवासीय प्रशिक्षण,
• 36%–44% तक की सब्सिडी,
• 5 लाख तक कोई मार्जिन मनी नहीं,
• 10 लाख तक बिना कोलैटरल ऋण,
• पशु क्लीनिक, मृदा परीक्षण, कृषि यंत्र किराया, जैविक खेती इनपुट, मिल्क कलेक्शन, कृषि पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण आदि जैसे कई क्षेत्रों में उद्यम स्थापित करने का अवसर शामिल है।
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विशेषज्ञों के विचार
श्री हिमांशु साहू, जिला विकास प्रबंधक, नाबार्ड, कांगड़ा, ने अपने संबोधन में कहा—
“एसीएबीसी योजना केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि कृषि क्षेत्र में नवाचार और आत्मनिर्भरता का मंच है। कांगड़ा जिला में कृषि–उद्यमिता की अपार संभावनाएँ हैं, और नाबार्ड सभी इच्छुक युवाओं को उद्यम स्थापित करने में हरसंभव सहयोग देगा।”इसके साथ उन्होने बैंकों को कृषि–उद्यमियों के ऋण अनुरोधों पर तेजी से कार्रवाई करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा—“यदि बैंक ऋण प्रक्रिया सरल और त्वरित करें, तो जिले में कृषि–स्टार्टअप संस्कृति तेजी से विकसित हो सकती है।”
डॉ. संजय शर्मा, प्रभारी केवीके कांगड़ा, ने कहा कि वैज्ञानिक तकनीक, विस्तार सेवाओं और उद्यमिता प्रशिक्षण के संयोजन से कांगड़ा में कृषि का नया स्वरूप उभर रहा है।
श्री अभिनव सूद, उपनिदेशक कृषि कार्यालय, ने विभाग द्वारा उपलब्ध तकनीकी सहायता और आत्मा/केवीके के साथ बेहतर समन्वय पर बल दिया।
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कृषि–उद्यमियों की प्रेरक उपस्थिति
कार्यक्रम में शामिल स्थानीय कृषि–उद्यमियों ने अपनी चुनौतियाँ और सफलताएँ साझा कीं।
उनकी चर्चाओं ने युवाओं में इस योजना का लाभ उठाकरलाभकारी कृषि–उद्यम शुरू करनेकी नई प्रेरणा जगाई।
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बैंकों और नाबार्ड का संयुक्त संकल्प
कार्यशाला में यह निर्णय लिया गया कि—
• एसीएबीसी के ऋण–संबंधी मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी,
• सब्सिडी वितरण प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा,
• प्रत्येक ब्लॉक में अधिक कृषि–क्लीनिक और एग्री–स्टार्टअप स्थापित करने के लिए विभागीय समन्वय को मजबूत किया जाएगा।
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आह्वान
नाबार्ड ने जिले के इच्छुक कृषि स्नातकों, युवाओं और प्रगतिशील किसानों से आग्रह किया है कि वे इस योजना से जुड़कर अपने स्वयं के कृषि–आधारित उद्यम स्थापित करें।
अधिक जानकारी के लिए:
जिला विकास प्रबंधक, नाबार्ड, कांगड़ा से संपर्क करें अथवाhttps://acabc.gov.inपर जाएँ।