प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली के रोहिणी में अंतर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन 2025 को संबोधित किया। इस अवसर पर बोलते हुए श्री मोदी ने कहा कि अभी सुने गए मंत्रों की ऊर्जा अभी भी हर कोई महसूस कर रहा है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि जब भी वे इस समूह के बीच आते हैं, तो उन्हें एक दिव्य और असाधारण अनुभूति होती है। उन्होंने इस अनुभूति का श्रेय स्वामी दयानंद जी के आशीर्वाद को दिया। प्रधानमंत्री ने स्वामी दयानंद जी के आदर्शों के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की। उन्होंने उपस्थित सभी विचारकों के साथ अपने दशकों पुराने जुड़ाव का उल्लेख किया, जिसके कारण उन्हें बार-बार उनके बीच आने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि जब भी वे उनसे मिलते हैं और बातचीत करते हैं, तो वे एक विशिष्ट ऊर्जा और अनूठी प्रेरणा से भर जाते हैं।
श्री मोदी ने याद दिलाया कि पिछले वर्ष गुजरात में महर्षि दयानंद सरस्वती जी की जन्मस्थली पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें उन्होंने एक वीडियो संदेश के माध्यम से भाग लिया था। इससे पहले, उन्हें दिल्ली में महर्षि दयानंद सरस्वती जी की 200वीं जयंती समारोह का उद्घाटन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। उन्होंने कहा कि वैदिक वेदमंत्रों के उच्चारण की ऊर्जा, वो हवन अनुष्ठान, ऐसा लगता है जैसे अभी वो सब कल की ही बात हो।
प्रधानमंत्री ने यह भी स्मरण किया कि पिछले आयोजन में, सभी प्रतिभागियों ने महर्षि दयानंद सरस्वती जी की द्विशताब्दी समारोह को दो वर्षों तक एक 'विचार यज्ञ' के रूप में जारी रखने का संकल्प लिया था। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि यह निर्बाध बौद्धिक आयोजन पूरी अवधि तक जारी रहा। श्री मोदी ने कहा कि उन्हें इस अवधि के दौरान किए गए प्रयासों और कार्यक्रमों के बारे में नियमित रूप से जानकारी दी जाती रही है। उन्होंने कहा कि आज, एक बार फिर, उन्हें आर्य समाज के 150वें स्थापना वर्ष समारोह में अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर मिला है। उन्होंने स्वामी दयानंद सरस्वती जी के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित किए और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के लिए अपनी शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने यह भी कहा कि इस अवसर पर स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी करना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
प्रधानमंत्री ने कहा, “आर्य समाज की 150वीं वर्षगांठ केवल किसी विशेष समुदाय या संप्रदाय का अवसर नहीं है—यह पूरे राष्ट्र की वैदिक पहचान से गहराई से जुड़ा उत्सव है।” उन्होंने कहा कि यह भारतीय दार्शनिक परंपरा से जुड़ा है, जिसमें गंगा के प्रवाह की तरह आत्म-शुद्धि की शक्ति है। श्री मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि यह अवसर सामाजिक सुधार की उस महान विरासत में निहित है जिसे आर्य समाज ने निरंतर आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन ने असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों को वैचारिक शक्ति प्रदान की। उन्होंने लाला लाजपत राय और शहीद रामप्रसाद बिस्मिल जैसे कई क्रांतिकारियों का उदाहरण दिया, जिन्होंने आर्य समाज से प्रेरणा ली और स्वतंत्रता संग्राम के लिए खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया। प्रधानमंत्री ने खेद व्यक्त किया कि राजनीतिक कारणों से, स्वतंत्रता आंदोलन में आर्य समाज की महत्वपूर्ण भूमिका को वह मान्यता नहीं मिली जिसका वह वास्तव में हकदार था।
यह उल्लेख करते हुए कि अपनी स्थापना के समय से ही आर्य समाज निष्ठावान देशभक्तों की संस्था रही है, श्री मोदी ने जोर देकर कहा, "आर्य समाज ने निडरता से भारतीयता के सार को कायम रखा है और उसका प्रचार-प्रसार किया है।" उन्होंने कहा कि चाहे भारत-विरोधी विचारधाराएँ हों, विदेशी सिद्धांतों को थोपने के प्रयास हों, विभाजनकारी मानसिकताएँ हों या सांस्कृतिक ताने-बाने को दूषित करने के प्रयास हों, आर्य समाज ने हमेशा उनका डटकर सामना किया है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि आर्य समाज के 150वें वर्ष के उपलक्ष्य में समाज और राष्ट्र, दयानंद सरस्वती जी के महान आदर्शों को इतने भव्य और सार्थक तरीके से श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
धार्मिक जागरण के माध्यम से इतिहास को नई दिशा देने वाले स्वामी श्रद्धानंद जैसे आर्य समाज के अनेक विद्वानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि इस ऐतिहासिक क्षण में ऐसी महान आत्माओं की ऊर्जा और आशीर्वाद मौजूद है। मंच से उन्होंने इन असंख्य महान आत्माओं और उनकी स्मृति को नमन किया।