हिमाचल प्रदेश की राजनिति इस बार भाजपा की ओर से सत्ता में वापिसी के लिये लगाये गये टेढी चोटी के जोर के बीच हमीरपुर जिला की राजनिति में राजनिति की तसवीर बदली बदली नजर आई। केन्द्रिय मंत्री अनुराग ठाकुर के गृह जिला हमीरपुर में इस बार भाजपा को बडे पैमाने पर बगावत को झेलना पड रहा है। एक वक्त था , हमीरपुर जिला में भाजपा की तूती बोलती थी। यहां की धरती ने ठाकुर जगदेव चंद व प्रेम कुमार धूमल से लेकर अनुराग ठाकुर जैसे नेता भाजपा को दिये।
लेकिन मौजूदा चुनावों में भाजपा इस बार धूमल और नड्डा खेमे के बीच चल रही तनातनी और धूमल को किनारे लगाने से लोगों में पार्टी संकट के दौर से गुजर रही है। पिछले चुनावों में सुजानपुर से प्रेम कुमार धूमल को मिली करारी हार के बाद धमल को इस बार सत्ता में वापिसी करने का इंतजार था। लेकिन उनकी हसरत उस समय अधूरी रह गई, जब भाजपा ने उन्हें सुजानपुर से टिकट देने से मना कर दिया। जिससे चुनावी महौल में धूमल समर्थकों को निराशा हाथ लगी हे। खुद अनुराग ठाकुर भी सुजानपुर में एक रैली के दौरान उस समय भावुक हो गये , जब उनके पिता के टिकट कटने का मामला चरचा में आया। चुनाव प्रचार के दौरान आपसी एकजुटता के दावों के विपरीत यहां गुटबाजी का महौल देखने को मिला। और बागीयों के चुनाव मैदान में कूदने से भाजपा के लिये मुसीबत खडी हो गई।
जिला में नादौन , हमीरपुर सदर , बडसर, भोरंज और सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र हैं। नादौन चुनाव क्षेत्र में भाजपा ने इस बार पिछला चुनाव हारे विजय अगिनहोत्री को मैदान में उतारा है। और कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी सीएम पद के दावेदार सुखविन्दर सिंह सुक्खू हैं। हालांकि आम आदमी पार्टी के शैंकी ठकुराल भी मैदान में हैं। लेकिन मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही हैं। यहां भाजपा की अंदरूनी लडाई किसी से छिपी नहीं है। विजय अगिनहोत्री के विरोधी सुक्खू संग हो लिये हैं। वैसे भाजपा प्रत्याशी का विवादों से गहरा नाता रहा है। यही वजह रही है कि अभी तक उनका प्रचार गति नहीं पकड पाया है। कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी सुखविन्दर सिंह सुक्खू की यहां स्थिती मजबूत हैं। सुक्खू युवाओं में खासे लोकप्रिय हैं। और सीएम पद पर उनकी दावेदारी के चलते उनको लोगों का समर्थन मिल रहा है।
वहीं, हमीरपुर सदर सीट पर भाजपा प्रत्याशी नरेन्दर ठाकुर इस बार पार्टी के बागी की वजह से बीच मंझधार में फंस गये हैं। नरेन्दर ठाकुर पिछली बार प्रेम कुमार धूमल की वजह से आसानी से चुनाव जीत गये थे। लेकिन इस बार हालात ऐसे हैं। कि भाजपा प्रत्याशी मुकाबले से बाहर होता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस पार्टी ने पुष्पिंदर ठाकुर को मैदान में उतारा है। लेकिन भाजपा से बगावत कर चुनाव मैदान में उतरे अशीष शर्मा को खेल बिगाड दिया है। यहां कांग्रेस प्रत्याशी और निर्दलीय उम्मीदवार के बीच मुकाबला है।
बडसर में भाजपा ने पूर्व विधायक बलदेव शर्मा की पत्नी माया शर्मा को मैदान में उतारा है। लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार इंन्द्र दत्त लखनपाल के सामने उनका कद छोटा दिखाई दे रहा हैं। लखनपाल पिछली बार भी चुनाव जीत चुके हैं। और इस बार भी उनकी स्थिती मजबूत हैं। हालांकि यहां केन्द्रिय मंत्री अनुराग ठाकुर ने चुनाव प्रचार किया है। लेकिन उसका असर कितना पडा होगा, यह तो आने वाले समय में ही पता चलेगा। यहां भी भाजपा के बागी भाजपा पर भारी पड रहे हैं।
भोंरज सीट रिजर्व है। भोरंज में कांग्रेस पार्टी ने सुरेश कुमार को टिकट दिया है। और भाजपा ने पूर्व मंत्री ईशवर दास धीमान के बेटे अनिल धीमान को टिकट दिया है। यहां कांग्रेस पार्टी में पहले की तरह खींचतान नहीं है। लेकिन यहां भाजपा के बागी पवन कुमार ने भाजपा का सारा खेल बिगाड दिया है। अगर भाजपा के बागी पवन दस हजार से अधिक वोट ले जाते हैं, तो भाजपा का यहां चुनाव हारना तय है।
सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा अपने ही बिछाये जाल में फंस गई है। यहां से इस बार भाजपा ने पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल का टिकट मानों मुसीबत ही मोल ले ली है। यहां धूमल समर्थकों में पार्टी के प्रति गुस्सा है। धूमल की जगह भाजपा ने कैप्टन रणजीत सिंह को मैदान में उतारा है। लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार राजेन्दर राणा के सामने भाजपा के कैप्टन कम अनुभवी हैं। राजेन्दर राणा ने ही पिछली बार प्रेम कुमार धूमल को हराया था। इस बार राणा की स्थिती मजबूत है। आसानी से कांग्रेस चुनाव जीत सकती है।