Nestle India ने अर्थ डे से पहले हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत शहरों पालमपुर और डलहौजी में प्रोजेक्ट हिलदारी को और मजबूत बनाते हुए पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।यह पहल प्लान फाउंडेशन और तकनीकी भागीदार आरईसिटी इंडिया प्रा. लि.के साथ मिलकर चलाई जा रही है। बीते पाँच वर्षों में प्रोजेक्ट हिलदारी ने देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में समावेशी और टिकाऊ कचरा प्रबंधन के मॉडल तैयार किए हैं।
यह प्रोजेक्ट फिलहाल पोंडा,मसूरी,महाबलेश्वर,मुन्नार,दार्जिलिंग,डलहौजी,पालमपुर,पंचगनी और जूनागढ़ जैसे शहरों में सफलतापूर्वक चल रहा है। पालमपुर में यह प्रोजेक्ट अक्टूबर 2023 में शुरू हुआ और बहुत कम समय में कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में एक मिसाल बन गया है। इस बदलाव में स्थानीय लोगों की भागीदारी और सामूहिक प्रयासों की बड़ी भूमिका रही है। अब तक इस पहल के तहत 12900 घरों,2000 दुकानों और अन्य व्यवसायिक स्थानों को जोड़ा जा चुका है साथ ही यहां हर साल आने वाले करीब आठ लाख पर्यटकों को भी इसका लाभ मिल रहा है।
खास बात यह है कि पालमपुर में 82प्रतिशत कचरे को सही ढंग से अलग किया जा रहा है और 85 प्रतिशत इलाकों से नियमित रूप से कचरा उठाया जा रहा है। यहां 155 सफाईकर्मियों को प्रशिक्षित कर इस अभियान से जोड़ा गया है।डलहौजी में यह पहल जून 2020 में शुरू हुई थी और अब तक 1219 मीट्रिक टन से अधिक कचरे को लैंडफिल में जाने से रोका गया है। यहां भी 82प्रतिशत कचरे का स्रोत पर ही अलगाव सुनिश्चित किया जा रहा है और 20 सफाईकर्मियों को इससे जोड़ा गया है।
नेस्ले इंडिया के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर सुरेश नारायण ने कहा पहाड़ी इलाके प्रकृति की दृष्टि से बेहद संवेदनशील होते हैं। पांच साल पहले हमने प्रोजेक्ट हिलदारी के रूप में एक अहम पहल की शुरुआत की थी। हमारा उद्देश्य था कि सामूहिक प्रयासों से टिकाऊ कचरा प्रबंधन के मॉडल विकसित हों। यह प्रोजेक्ट साझेदारी की शक्ति का उदाहरण है जिसने हमारे विचारों को ज़मीनी हकीकत में बदलने का काम किया है। आने वाले समय में यह पहल न सिर्फ जागरूकता बढ़ाएगी बल्कि सफाईकर्मियों को सम्मान दिलाने और कचरा प्रबंधन व्यवस्था में सुधार की दिशा में भी काम करती रहेगी।
प्लान फाउंडेशन की निदेशक सुश्री नेहा शशिकुमार ने कहा हम मानते हैं कि कोई भी बदलाव तभी टिकाऊ हो सकता है जब समाज,संस्थाएं और लोग मिलकर साझा उद्देश्य के साथ काम करें।प्रोजेक्ट हिलदारी इसका बेहतरीन उदाहरण है जो सफाईकर्मियों को सशक्त बनाता है नागरिकों को जागरूक करता है और शहरों में मजबूत तथा टिकाऊ व्यवस्था खड़ी करता है। हमारा फोकस शुरू से ही लोगों की सोच और व्यवहार में बदलाव लाने पर रहा है। वर्ल्ड अर्थ डे के मौके पर हम अपनी इस साझेदारी को और मजबूत करने और देशभर में पुनर्चक्रण आधारित कचरा प्रबंधन मॉडल तैयार करने की दिशा में प्रतिबद्ध हैं।पिछले पांच सालों में प्रोजेक्ट हिलदारी ने स्रोत पर ही कचरा अलग करने की प्रक्रिया के ज़रिये करीब 47000 मीट्रिक टन कचरे को लैंडफिल में जाने से रोका है। अब तक यह प्रोजेक्ट देशभर के 64000 से अधिक घरों और व्यावसायिक संस्थानों से जुड़ चुका है जहां लगभग 81 प्रतिशत कचरे को सही तरीके से अलग किया गया है।इन नौ शहरों में अब तक करीब 1650 सफाईकर्मियों को प्रशिक्षण देकर उन्हें इस क्षेत्र से पेशेवर रूप से जोड़ा गया है।