एचएएस बनने के लिए अपराजिता ने वर्ष 2013 में पहली बार प्रयास किया था, लेकिन सफलता हासिल नहीं हो पाई। इस असफलता के बावजूद अपराजिता ने उम्मीद नहीं छोड़ी और एसएएस की तैयारी में डटी रहीं। लिहाजा एचएएस के पांचवें प्रयास के दौरान अपारिजता ने टॉप आकर अपने लक्ष्य को हासिल किया है। अपराजिता ने वर्ष 2014 में सिविल सर्विसेस की परीक्षा भी उतीर्ण कर ली थी।
और आर्मी हेडक्वार्टर साउथ ब्लॉक दिल्ली में बतौर सेक्शन ऑफिसर सेवाएं दी
सेक्शन आफिसर के पद मिल जाने के बाद भी अपराजिता ने अपने एचएएस के लक्ष्य को नहीं छोड़ा। नौकरी के साथ-साथ वह एएचएस की तैयारी भी करती रही। एचएएस अपराजिता बिलासपुर की झंडूता पंचायत के एक छोटे से गांव भंजवानी से तालुक रखती हैं। इनकी नर्सरी से दसवीं तक की शिक्षा डीएवी स्कूल बिलासपुर से हुई है। अपराजिता चंदेल ने 2006 में दसवीं की परीक्षा 93 प्रतिशत से पास की। जमा एक व दो की पढ़ाई डीएवी स्कूल हमीरपुर से पूरी की। इसके उपरांत अपराजिता ने वर्ष 2008 से 2012 एनआईटी हमीरपुर से कंप्यूटर साइंस इंजीनिरिंग में ग्रेजुएशन की । अपराजित बचपन से ही अपने स्कूल की हर गतिविधि में बढ़चढ़ कर भाग लिया करती थी। बचपन से ही उसका सपना प्रसासनिक सेवा में जाने का था।