भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डाॅ0 राजीव बिन्दल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में विगत 22-23 महीनो से कांग्रेस पार्टी की सरकार काबिज है और आए दिन नये-नये कीर्तिमान यह सरकार बना रही है। हिमाचल प्रदेश के माननीय उच्च न्यायालय ने इस सरकार की कार्यप्रणाली पर बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह लगाते हुए दिल्ली में स्थित हिमाचल भवन व इसकी सम्पति को अटैच करने के निर्देश दिए हैं।
डाॅ0 बिन्दल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के इतिहास में कभी ऐसा सोचा भी नहीं जा सकता कि किसी पेमैंट को करने के लिए माननीय उच्च न्यायालय ने आदेश किए और सरकार ने वो पेमैंट न की हो जिसके कारण एक बहुत बड़ा ब्लाॅट हिमाचल प्रदेश की सरकार व हिमाचल प्रदेश की जनता के उपर यह ब्लाॅट लगाने का काम प्रदेश की वर्तमान सुखविन्द्र सिंह सुक्खू सरकार ने किया है।
डाॅ0 बिन्दल ने कहा कि इस परिस्थिति में सवाल खड़े होते हैं कि सरकार आए दिन जो फैंसले लेती है वो जनहित से हटकर लेती है। सत्ता में आने के बाद वर्तमान सरकार ने 1500 संस्थान बंद करने का बहुत बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया जिसके कारण जनता को भारी परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है। कहीं स्कूल बंद हो गया, कहीं काॅलेज बंद हो गया, कहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बंद हो गया, मरीजो के ईलाज के लिए चल रही हिमकेयर योजना बंद हो गई जिसके कारण हजारों मरीजों को असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। इस सरकार यह पता नहीं चलता कि कब क्या निर्णय हो जाता है। कभी समोसे की जांच के कारण पूरे देश, प्रदेश में फजीहत हो जाती है, कभी घर की प्रत्येक टाॅयलेट शीट पर टैक्स लगाने का निर्देश जारी हो जाता है
अर्थात यह कहा जा सकता है कि दो साल की वर्तमान कांग्रेस सरकार है पूरी तरह से विफल सरकार है जिसने हिमाचल प्रदेश के जनमानस को अनेक-अनेक प्रकार के कष्ट दिए, अनेक-अनेक प्रकार के नुकसान पहुंचाए, हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी को पूरी तरह से तहस-नहस किया और हिमाचल प्रदेश पर अनेक प्रकार के दाग लगाने का काम वर्तमान प्रदेश सरकार ने किया है, जो माननीय उच्च न्यायालय का फैंसला है वो प्रदेश व प्रदेश सरकार पर काला दाग प्रतीत होता है।
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने एक महत्वपू्र्ण मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली के मंडी भवन स्थित हिमाचल भवन को अटैच करने का आदेश दिया है. हाई कोर्ट के ये आदेश बिजली कंपनी की रकम ना लौटाने से जुड़े केस में दिए गए हैं. अदालत ने बिजली विभाग के प्रधान सचिव को इस मामले में फैक्ट फाइंडिंग जांच के आदेश भी दिए हैं, ताकि उन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जा सके, जिनकी लापरवाही से यह स्थिति बनी. क्या है पूरा मामला हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में चिनाब नदी पर 400 मेगावाट के सेली हाइड्रो प्रोजेक्ट बनना था. इस प्रोजेक्ट में पहले भी आर्बिट्रेशन में प्रदेश सरकार को कंपनी की ओर से जमा की गई 64 करोड़ रुपये की अपफ्रंट मनी 7 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने का आदेश मिला था, लेकिन हिमाचल प्रदेश सरकार में कोर्ट के इस आदेश की अवहेलना की. जिसके बाद ब्याज समेत यह राशि अब 150 करोड़ पहुंच गई है. कोर्ट ने जांच के भी आदेश दिए हाई कोर्ट के न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने सेली हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी लिमिटेड द्वारा ऊर्जा विभाग के खिलाफ दायर अनुपालना याचिका पर सुनवाई के पश्चात यह आदेश दिए. कोर्ट ने एमपीपी और पावर विभाग के प्रमुख सचिव को इस बात की तथ्यात्मक जांच करने के आदेश भी दिए कि किस विशेष अधिकारी अथवा अधिकारियों की चूक के कारण 64 करोड़ रुपए की 7 फीसदी ब्याज सहित अवार्ड राशि कोर्ट में जमा नहीं की गई है. हाई कोर्ट ने कहा कि दोषियों का पता लगाना इसलिए जरूरी है क्योंकि ब्याज को दोषी अधिकारी अधिकारियों-कर्मचारियों से व्यक्तिगत रूप से वसूलने का आदेश दिया जाएगा. कोर्ट ने 15 दिनों की अवधि के भीतर जांच पूरी करने और जांच की रिपोर्ट को अगली तारीख को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत के आदेश भी दिए. अब इस मामले पर अगली सुनवाई 6 दिसंबर को होगी.