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कांगडा | Cabinet मंत्री चन्द्र कुमार का जीवन परिचय

Updated on Sunday, January 08, 2023 13:48 PM IST

सुखविन्दर सिंह सुक्खू सरकार में आज शपथ लेने वाले कांगडा जिला से एकमात्र मंत्री चंदर कुमार हैं। चंदर कुमार का  का जन्म 8 मई, 1944 को स्व0 श्री बेली राम के घर ग्राम ढान, तहसील ज्वाली, जिला कांगड़ा में हुआ । आपके पिता एक कृषक थे । आपने अपनी उच्च शिक्षा पंजाब व हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से हासिल की।

एम0ए0, एम 0एड0 तथा बी0ए0, एल0एल0बी0 तक की शिक्षा प्राप्त की है। राजनीति में प्रवेश करने से पूर्व आप शिमला स्थित सेंट बीटस कॉलेज में एक प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक के रूप में कार्यरत्त रहे तथा बाद में आपने अपने पद से इस्तिफा दे दिया । चन्द्र कुमार विवाहित हैं तथा आपके एक पुत्र एवं पुत्री हैं । पुत्र श्री नीरज भारती दो बार विधान सभा के सदस्य रहे तथा हिमाचल प्रदेश सरकार में मुख्य संसदीय सचिव के पद पर भी रहे हैं ।

चन्द्र कुमार क्रमश: वर्ष 1982, 1985, 1993, 1998 तथा 2003 में विधान सभा के सदस्य के रूप में निर्वाचित हुए हैं । चन्द्र कुमार 1982 में एच0आर0टी0सी0 के उपाध्यक्ष नामित किए गए । आप 1982 से 1985 तक स्वास्थ्य, उच्च शिक्षा और जन-सम्पर्क, उप-मंत्री, 14 अप्रैल, 1984 से मार्च, 1985 तक वन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), मार्च 1985 से 1989 तक कृषि और कला, भाषा एवं संस्कृति व मत्स्य राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), 1989 से 1990 सिंचाई, जन-स्वास्थ्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और तकनीकी शिक्षा मंत्री तथा 1993 से 1998 और 6 मार्च, 2003 से 31 मई, 2004 तक वन मंत्री बने रहे ।

पहला चुनाव वर्ष 1977 में आजाद प्रत्याशी के रूप में लड़ा तथा 500 से भी कम मतों के अन्तर से चुनाव में पिछड़ गए । उसके पश्चात 1982 से आज तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख नेता के रूप में विद्यमान हैं । आप हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी में कोषाध्यक्ष, महासचिव तथा उपाध्यक्ष जैसे उच्च पदों पर तैनात रहे हैं तथा कई वर्षों तक अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य रहे हैं । आप वर्तमान में हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष के पद पर तैनात हैं । हिमाचल प्रदेश सरकार में वन मंत्री रहते आपने सेबों की पेटियों के लिए वन कटान पर प्रतिबन्ध लगा दिया था तथा विकल्प के रूप में Popular तथा कार्टन बॉक्स को बागवानों को उपयोग में लाने के लिए प्रेरित किया जो आज भी बखूबी जारी है।

वर्ष 2004 में कांगड़ा संसदीय क्षेत्र से 14वीं लोक सभा के लिए कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा तथा तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री व पूर्व मुख्य मंत्री श्री शान्ता कुमार को पराजित किया । आपने अपने इस बेहतरीन कार्यकाल में जिला कांगड़ा के कंदरोड़ी में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया का कारखाना स्थापित करवाया तथा धर्मशाला के लिए केन्द्रीय विश्वविद्यालय को मंजूर करवाया । आपने अपने इसी कार्यकाल में जिला कांगड़ा में National Fashion & Designing Institute स्थापित किया तथा UPA-1st सरकार में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल टांडा मैडिकल कॉलेज के लिए केन्द्र सरकार से 125 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत करवाई । इस कार्यकाल में Record समय के भीतर कांगड़ा व पठानकोट को जोड़ने वाले चक्की ब्रिज का निर्माण करवाया। आपने केन्द्रीय ऊर्जा मंत्रालय से राजीव गांधी विद्युतिकरण के तहत बिजली विभाग को 90 प्रतिशत अनुदान तथा 10 प्रतिशत लोन System Improvement हेतु मुहैया करवाया । आपने UPA प्रथम 14वीं लोकसभा के कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण बिल जैसे Right to Food, Right to Health, Right to Employment (मनरेगा), Right to information तथा Right to Education को पारित करवाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

जिला कांगड़ा के ओ0बी0सी0 वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं तथा जिला कांगड़ा के आज भी वरिष्ठतम एवं कद्दावर नेता हैं । आप 8 दिसम्बर, 2022 को ज्वाली-9 निर्वाचन क्षेत्र से चौदहवीं विधान सभा के लिए निर्वाचित हुए हैं ।

 चंद्र कुमार का जन्म 8 मई, 1944 को कांगड़ा जिला की जवाली तहसील के धन गांव में स्वर्गीय श्री बेली राम के घर हुआ। इन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला से एम.ए., एम.एड. और एल.एल.बी. की उपाधि प्राप्त की है। इनका विवाह श्रीमती कृष्णा देवी से 2 मार्च 1976 को हुआ। इनका एक बेटा और एक बेटी हैं। यह एक कृषक भी हैं।
यह समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान और दूरदराज के लोगों की शिकायतों के निवारण मंे समर्पित रहे हैं। इन्होंने पूर्ण राज्यत्व के संघर्ष में सक्रिय रूप से भाग लिया। वर्ष 1968 में इन्होंने एक शिक्षक के रूप में कार्य प्रारंभ किया। बाद में यह सरकारी सेवाओं से त्याग-पत्र देकर सक्रिय राजनीति मंे शामिल हुए। राज्य युवा कांग्रेस के सक्रिय सदस्य के रूप में इन्होंने शिमला के भट्ठा कुफर (संजय वन) में वृहद् पौधरोपण अभियान मंे भाग लिया। इन्होंने वर्ष 1978 से 1982 तक शिमला के प्रतिष्ठित सेंट बीड्ज कॉलेज में भूगोल विषय में शिक्षा भी प्रदान की। वर्ष 1981 में इन्होंने नई दिल्ली में आयोजित शिक्षा पर राष्ट्रीय अधिवेशन में बतौर संयुक्त संयोजक के रूप में राज्य का प्रतिनिधित्व किया।
वर्ष 1977 में राज्य विधानसभा के लिए चुनाव लड़ा, वर्ष 1982 और 1985 मंे यह राज्य विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए, 1990 में पुनः चुनाव लड़ा। इसके उपरांत वर्ष 1993, 1998 और 2003 में पुनः विधायक चुने गए।
वर्ष 1982-85 तक हिमाचल पथ परिवहन निगम के उपाध्यक्ष रहे। 14 अप्रैल 1984 से मार्च 1985 तक यह स्वास्थ्य, उच्च शिक्षा और सूचना एवं जन संपर्क विभाग के उप-मंत्री रहे। मार्च 1985 से 1989 तक यह वन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रहे। वर्ष 1989 से 1990 तक यह कृषि और कला, भाषा एवं संस्कृति तथा मत्स्य पालन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रहे। इन्होंने वर्ष 1993 से 1998 तक सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और तकनीकी शिक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया। इसके अतिरिक्त यह वन मंत्री भी रहे।
यह कांगड़ा लोकसभा क्षेत्र से वर्ष 2004 से 2009 तक सांसद रहे। 14वीं विधानसभा के लिए दिसंबर 2022 में यह पुनः विधायक चुने गए।

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