संजय भारद्वाज की मेहनत से बन रहा है हिमाचल प्रदेश के किसानों बागवानों का लोकप्रिय ब्रांड।
नैनो तकनीक से बने उच्च गुणवत्ता वाले ऑर्गनिक कृषि उत्पादों की ट्रेडिंग कंपनी।
हिमाचल प्रदेश के जोगिंदर नगर के रहने वाले संजय भारद्वाज नैनो तकनीक से बने ऑर्गनिक कृषि और बागवानी में उपयोग होने वाली खादों और पोषक तत्वों से भरपूर स्प्रे और मिट्टी में दिए जाने वाले जरूरी पोषण युक्त उत्पादों के मुख्य ट्रेडर हैं।
उनका कहना है कि किसान की इनपुट लागत को कम करने के लिए नैनो फर्टीलाइजर वरदान है और उपयोग बहुत जरूरी है और यह सब ऑर्गनिक में हो तो सोने पर सुहागे वाली बात हो जाती है। संजय भारद्वाज का कहना है कि मार्केट में बहुत सारे उत्पाद हैं उनमें से सही को चुनना और बागवानों तक पहुंचना एक चुनौती भरा काम है, सही उत्पाद किसान तक पहुंचे उसके लिए मैं लगातार काम करता हूं, विशेषज्ञयों से इनके बारे चर्चा करना और ट्रायल लगवाना और समय समय पर मॉनिटर करना और सहयोगियों से रिपोर्टिंग लेना सही पाए जाने पर ही किसान बागवानों को उपयोग के लिए देना यही सब हमारे प्रति किसानों के विश्वास को बढ़ाता है और मुझे अधिक काम करने की ऊर्जा प्रदान करता है।
उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी किसानों की अपनी कंपनी है इसी स्लोगन को लेकर वह आगे बढ़ रहे हैं मैं जिन कंपनियों के उत्पाद बेचता हूं उनमें से प्रमुख श्री कृष्णायन देसी गौरक्षा सेवा समिति, हरिद्वार से है इनके मुख्य उत्पाद देसी गाय के गोबर से बनी जीवांश बायो एंरिच्चड शुद्ध ठोस और तरल खाद है जो कि जैविक खेती के लिए बहुत लाभदायक है, दूसरी कंपनी डां लिंनफील्ड लैबोरेटरीज हैं जो कि आर्गेनिक नैनो फर्टीलाइजर बनाती है जिसके मुख्य उत्पादों में काला मोती, फर्टीमाइन पाऊडर, और तरल में ऑक्सीडिनायल, जिंक, बोरोन, सल्फर, कैल्शियम नाईट्रेट, कैल्शियम बोरोन, न्यूट्रीफीट, ऐपीपी ग्रीन, फ़िक्सर, इत्यादि है यह सब कार्बन आधारित हैं।
इसके अलावा बाटैनिकल उत्पाद भी हैं जो कि प्लांट एक्स्ट्रैट बेस हैं जिनमें से मुख्यत वायरस, नेमाटोड, फफूंद, कीट नियंत्रण और ग्रोथ के लिए हैं।
इसके अलावा कल्चरल आधारित सूडोमोनास, ट्राईकोडरमा, बेवेरिया, मेटारहिजियम, माईकोरोजा इत्यादि उपलब्ध हैं।
संजय भारद्वाज ने बताया कि शुरुआती दिनों में जब आर्गनिक के नाम से केवल वर्मीकंपोस्ट को ही बेचा जाता था जो कि केवल मिट्टी पर ही उपयोग होता था फोलियर के लिए कुछ नहीं था, केवल किसान बागवान को ठगा ही जाता था और न ही सही जानकारी उपलब्ध होती थी और इन सब के अभाव में बागवान नुकसान झेलता था मगर अब हिमाचल एग्रीकल्चर इनपुट एक ऐसा प्लेटफॉर्म हमनें तैयार कर दिया है जहां से हमारे किसान बागवान भाई सही जानकारी लेते हैं और अपनी शुद्ध और स्वस्थ खेती को आगे बढ़ाते हैं।
उनका कहना है कि मेहनत, लग्न और सही मार्ग दर्शन से ही आगे बढ़ा जा सकता है ठगी और स्वार्थीपन से नहीं।