बता दें कि वेद मंदिर योल में अप्रैल माह से वेदों की पावन ऋचाओं के साथ यज्ञ किया जा रहा है। जिसमें योगाचार्य स्वामी राम स्वरूप की अध्यक्षता में वेदों की ऋचाओं के उच्चारण के साथ अनुष्ठान हो रहा है। जन कल्याण के उद्देश्य से हो रहे इस यज्ञ की पूर्णाहुति कल डाली जाएगी।
मान्यता है कि इस तरह का आटा देखकर पूर्वज किसी भी रूप में आते हैं और उसे ग्रहण करते हैं।यही कारण है कि जब मनुष्यों के ग्रहण करने के लिए आटा गूंथा जाता है तो उसमें उंगलियों के निशान बना दिए जाते हैं।