स्पैशल ओलंपिक भारत व चेतना संस्था के सौजन्य से स्पैशल ओलंपिक जिला कांगड़ा इकाई द्वारा बौद्धिक अक्षम बच्चों के लिए एक दिवसीय जिला स्तरीय क्विज ज्ञान प्रतियोगिता का आयोजन कॉर्ड ट्रैनिंग सेंटर ,सिद्बाड़ी ,कांगड़ा में किया गया जिसमें कांगड़ा जिला की चार संस्थाओं के (हार्मनी डे केयर सेंटर, सूर्यो उदय ,रोटरी सेवा आश्रम व कॉर्ड ट्रैनिंग सेंटर ,सिद्बाड़ी)के 40 विशेष बच्चों ने भाग लिया। डॉ क्षमा मेत्रे – राष्ट्रीय निदेशिका -कॉर्ड , स्पेशल ओलिंपिक्स-कांगड़ा के प्रधान श्री प्रशांत भसीन व विशेष बच्चों ने किया।
स्पेशल ओलंपिक भारत की अध्यक्ष, डॉ. मल्लिका नड्डा ने कहा प्रतियोगिता में विजेता खिलाड़ियों को बैग मुमेंटो तथा विजेता प्रमाण पत्र दिए गए और अन्य सभी जितने भी खिलाड़ियों ने भाग लिया उन्हें भी प्रतिभागी प्रमाण पत्र व गिफ्ट प्रदान किए गए। सिया, दिया इश्त और अभिषेक राज्य स्तरीय प्रतियोगिता हेतु 17 फरवरी 2024 को बिलासपुर मे भाग लेंगे। आज के इस कार्यक्रम में उपस्थित सभी 40 विशेष बच्चों का डेंटल चेक-अप व आँखों का भी चेक-अप किया गया। इंडियन डेंटल एसोसिएशन -कांगड़ा से सचिव डॉ संगीत वर्मा , डॉ राहुल टंडन व डॉ स्वाती पांडे ने भाग लिया तथा बच्चों के दांतों का चेकअप किया गया तथा निदान कर सलाह व दवाइयाँ वितरित की।
SM Eye Hospital , Kangra से डॉ संदीप महाजन , डॉ मंजु व डॉ अमिताभ ने बच्चों की आँखों का चेक अप किया गया व निदान कर सलाह व दवाइयाँ वितरित की। आज के इस कार्यक्रम में उपस्थित रहे विशेष मेहमान श्री अरुण कुमार ब्रांच प्रवंधक ,भारतीय स्टेट बैंक सिद्धबाड़ी ,श्री तेज सिंह प्रधान रोटरी क्लव धर्मशाला व विजय शर्मा पूर्व प्रधान रोटरी क्लव धर्मशाला ,रितेश डोगरा प्रधान रोटरी क्लव-कांगड़ा ,श्री मति वविता, चेयरपर्सन बीoडीoसीo कांगड़ा,श्री मति विजेता चौधरी, डायरेक्टर ज्ञान ज्योति बीo एडo कालेज, राजोल स्पैशल ओलंपिक कांगड़ा कमेटी से सचिव बलबीर गुलेरिया, आनंद सुरेश,कविता,अनुराधा,रजनी,प्रोफेसर आर के चोपड़ा, प्रोफेसर कुलदीप बंटा,कुमुद मेहता आदि।
गुरु द्रोणाचार्य कॉलेज आफ नर्सिंग ,योल ,व ज्ञान ज्योति बीo एडo कालेज, राजोल से 10-10 प्रशिक्षुओं ने वालन्टिएर के रूप में इस कार्यक्रम में अपना योगदान दिया।
विशेष बच्चों द्वारा रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया। अब यह समय समावेश का है,समाज में समावेश को एक क्रांति की तरह लाना होगा जिससे की कोई भी दिव्यांगजन एकल ना रहे। स्पेशल ओलिंपिक्स खेलों के माध्यम से बच्चों की क्षमताओं को निखार रहा है। जन मानस दिव्यांगजनों को अवसर प्रदान करे।
भारत में 'स्पेशल ओलंपिक भारत' के नाम से दिमागी रूप से कमजोर खिलाड़ियों का मान्यता प्राप्त कार्यक्रम चलता है। इसकी शुरुआत 1988 में 'स्पेशल ओलंपिक इंडिया' के रूप में हुई लेकिन 2001 में इसका नाम बदलकर 'स्पेशल ओलंपिक भारत' रखा गया। इस संस्था को भारत सरकार और ओलंपिक इंटरनेशनल द्वारा आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त है।