पटियाला घराने से सम्बंधित पंडित सोम दत्त बट्टू जिला शिमला के गांव होरी (ब्योलिया) के रहने वाले हैं इनका जन्म 5 जुलाई 1937 को इनके ननिहाल हि. प्र. जिला कांगड़ा के जसूर नामक स्थान में हुआ। इनकी आरंभिक संगीत शिक्षा घर से ही शुरू हुई है । इनके पिता पं. राम लाल बट्टू प्रसिद्ध श्याम चौरासी घराने से संबंधित कलाकार थे। पिता पं. राम लाल बट्टू पंजाब जिला जालंधर के नकोदर में कार्यरत थे जहां इनका बचपन गुजरा। आपनी संगीत यात्रा में पंडित जी ने ग्वालियर घराने के पं. कुञ्ज लाल शर्मा, पंजाब घराने के कर्म सिंह चक्रवर्ती तथा पटियाला घराने के मशहूर गायक उस्ताद आशिक अली खान के शिष्य पं. कुंदन लाल शर्मा से संगीत में तालीम हासिल की।
पंडित जी लगभग 36 वर्ष तक हिमाचल प्रदेश के विभिन्न महाविद्यालयों में संगीत के प्राध्यापक के तौर पर सेवा देते हुए कोटशेरा कॉलेज से सेवानिवृत्त हुए है। पंडित जी इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशन, विदेश मंत्रालय भारत सरकार में हिंदुस्तानी संगीत समिति के सदस्य एवं उच्च कोटि के कलाकार रहे हैं। पंडित जी ने हिंदुस्तानी संगीत समिति के सदस्य के रुप में भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा यूएसए, यूके, नाईजीरिया, कीनिया, वेस्टइंडिज, पाकिस्तान आदि देशों में संगीत के कार्यक्रम किए हैं।
हिमाचल के शिमला जिला के सोमदत्त बट्टू को इस बार का पद्मश्री पुरस्कार दिया है। वह कला के क्षेत्र में अतुलनीय काम के लिए नवाजे गए हैं।
पद्म पुरस्कारों घोषणा कर दी गई है। इस बार पांच पद्म विभूषण, 17 पद्मभूषण और 110 पद्मश्री सहित कुल 132 पद्म पुरस्कार दिए गए हैं। इस बार राष्ट्र ने ऐसे 34 गुमनाम नायकों को सम्मानित किया है, जिन्होंने अपने क्षेत्र में अतुलनीय कार्य किया है। इनमें पहली महिला महावत पार्वती बरुआ का नाम शामिल हैं। पार्वती ने रूढि़वादिता से उबरने के लिए 14 साल की उम्र में जंगली हाथियों को वश में करना शुरू किया था। उन्हें सामाजिक कार्य (पशु कल्याण) के क्षेत्र में पद्म श्री के लिए चुना गया है।
इसके अलावा जागेश्वर यादव (आदिवासी कार्यकर्ता), चामी मुर्मू (जनजातीय पर्यावरणविद् एवं महिला सशक्तिकरण), गुरविंदर सिंह (सामाजिक कार्य, हरियाणा) सत्यनारायण बेलेरी, जिन्होंने 650 से अधिक पारंपरिक चावल किस्मों को संरक्षित किया के साथदुखू माझी (सामाजिक कार्य, पश्चिम बंगाल) को सामाजिक कार्य (पर्यावरण वनीकरण) के क्षेत्र में पद्मश्री दिया जाएगा। इसके अलावा के चेल्लम्मल, संगथंकिमा (सामाजिक कार्य, मिजोरम) को भी पद्मश्री दिया जाएगा। इसके अलावा हेमचंद मांझी, यांग जमोहलेंगो इत्यादि को भी पद्मश्री पुरस्कार दिया गया है।