धर्मशाला, 29 सितंबर 2026। विश्व रेबीज दिवस के उपलक्ष्य में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, कांगड़ा की ओर से जोनल अस्पताल धर्मशाला के मीटिंग हॉल में जिला स्तरीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा अधिकारी कांगड़ा पद्मश्री डॉ. ओमेश भारती ने की। इस अवसर पर जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विक्रम कटोच, जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. आर.के. सूद सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
डॉ. ओमेश भारती ने विश्व रेबीज दिवस 2026 की थीम “Stronger Together” (एक साथ मजबूत) का उल्लेख करते हुए कहा कि रेबीज की रोकथाम के लिए जन-जागरूकता, पशु टीकाकरण और समय पर चिकित्सा सहायता बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि रेबीज एक वैक्सीन से रोकी जा सकने वाली जूनोटिक बीमारी है, जो संक्रमित पशु के काटने या खरोंचने तथा उसकी लार के घाव या श्लेष्म झिल्ली के संपर्क में आने से फैल सकती है।
उन्होंने कहा कि लक्षण विकसित होने के बाद रेबीज लगभग हमेशा घातक होता है, इसलिए संभावित संक्रमित पशु के काटने या खरोंचने के बाद उपचार में देरी नहीं करनी चाहिए। पालतू एवं सामुदायिक कुत्तों का टीकाकरण तथा लोगों, विशेषकर बच्चों में जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. आर.के. सूद ने बताया कि कुत्तों के अलावा बिल्ली, बंदर, नेवला और अन्य संक्रमित स्तनधारी पशु भी संक्रमण का स्रोत बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि पशु के काटने या खरोंचने की स्थिति में घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोना चाहिए और बिना देरी स्वास्थ्य संस्थान पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार रेबीज वैक्सीन एवं आवश्यक होने पर इम्युनोग्लोबुलिन (PEP) लेना चाहिए।
उन्होंने लोगों से अपील की कि घाव पर मिर्च, तेल, जड़ी-बूटी या अन्य घरेलू पदार्थ न लगाएं और झाड़-फूंक में समय बर्बाद न करें। कार्यक्रम में स्वास्थ्य पर्यवेक्षक, बीसीसी कोऑर्डिनेटर राजेंद्र शर्मा सहित विभागीय कर्मचारी उपस्थित रहे।