### ढाबन स्कूल में विश्व रेबीज दिवस पर विद्यार्थियों को किया जागरूक
**मंडी।** खंड चिकित्सा अधिकारी रत्ती डॉ. पीयूष वैद्य के सौजन्य से राजकीय उच्च पाठशाला ढाबन में विश्व रेबीज दिवस मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्कूल के मुख्याध्यापक नरेश कुमार ने की।
इस अवसर पर खंड स्वास्थ्य शिक्षक रत्ती सुरेश चंदेल ने विद्यार्थियों को रेबीज बीमारी, इसके कारण, लक्षण और बचाव के उपायों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रेबीज एक विषाणुजनित बीमारी है, जो संक्रमित स्तनधारी जानवरों के काटने या उनकी लार के घाव अथवा श्लेष्मा झिल्ली के संपर्क में आने से मनुष्यों में फैल सकती है। उन्होंने बताया कि रेबीज से बचाव के लिए समय पर उचित चिकित्सकीय उपचार और एंटी-रेबीज टीकाकरण बेहद महत्वपूर्ण है।
सुरेश चंदेल ने कहा कि रेबीज के अधिकांश मानव मामलों का संबंध संक्रमित कुत्तों के काटने से होता है। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि बीमारी के लक्षण सामने आने के बाद रेबीज लगभग हमेशा घातक होती है, जबकि समय पर उपचार मिलने पर इसे रोका जा सकता है। उन्होंने विश्व स्तर पर वर्ष 2030 तक कुत्तों से होने वाली रेबीज के कारण मानव मृत्यु को समाप्त करने के लक्ष्य की जानकारी भी विद्यार्थियों को दी।
उन्होंने बताया कि कुत्ते के काटने के बाद लक्षण सामने आने में कई सप्ताह से लेकर महीनों तक का समय लग सकता है। गंभीर स्थिति में बुखार, बेचैनी, भ्रम, उत्तेजना, निगलने में कठिनाई तथा पानी से डर जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। रेबीज मुख्य रूप से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है।
### कुत्ते के काटने पर तुरंत करें प्राथमिक उपचार
सुरेश चंदेल ने विद्यार्थियों को बताया कि यदि किसी व्यक्ति को कुत्ता या कोई अन्य संदिग्ध जानवर काट ले तो घाव को **तुरंत साबुन और बहते पानी से लगभग 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए**। इसके बाद बिना देरी किए स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचकर चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए और आवश्यकता के अनुसार एंटी-रेबीज टीकाकरण तथा अन्य उपचार शुरू करवाना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि जानवर के काटने के बाद घरेलू उपचार पर निर्भर न रहें और चिकित्सा सहायता लेने में देरी न करें। उन्होंने यह भी बताया कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में रेबीज से बचाव के लिए टीकाकरण की सुविधा उपलब्