ज्वालामुखी की सियासत में सोशल मीडिया का नया मोर्चा, फेसबुक पर संजय रतन की बड़ी डिजिटल मौजूदगी
ज्वालामुखी। ज्वालामुखी की राजनीति अब केवल चौपाल, जनसभाओं और गांवों की बैठकों तक सीमित नहीं रह गई है। राजनीतिक सक्रियता का एक बड़ा मंच सोशल मीडिया बन चुका है। फेसबुक पर नेताओं की मौजूदगी, उनके फॉलोअर और पोस्ट पर लोगों की प्रतिक्रिया अब स्थानीय राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन रही है। इसी डिजिटल तस्वीर में कांग्रेस विधायक संजय रतन की सोशल मीडिया मौजूदगी खास तौर पर चर्चा में है।
मौजूदा आंकड़ों के अनुसार संजय रतन के आधिकारिक फेसबुक पेज पर करीब 79 हजार फॉलोअर हैं। बताया जा रहा है कि करीब दो महीने पहले यह संख्या लगभग 71 हजार थी। इस हिसाब से दो महीनों में करीब 8 हजार फॉलोअर की वृद्धि हुई है। यह वृद्धि उनके सोशल मीडिया नेटवर्क के विस्तार की ओर इशारा करती है, हालांकि फॉलोअर संख्या को सीधे चुनावी समर्थन या लोकप्रियता का अंतिम पैमाना नहीं माना जा सकता।
संजय रतन वर्तमान में ज्वालामुखी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने जीत दर्ज की थी और मौजूदा विधानसभा में उनका कार्यकाल जारी है। PRS Legislative Research के रिकॉर्ड के अनुसार वह 8 दिसंबर 2022 से विधानसभा के सदस्य हैं।
पुराने राजनीतिक चेहरों की डिजिटल मौजूदगी
ज्वालामुखी की राजनीति में लंबे समय तक प्रभाव रखने वाले पूर्व मंत्री रमेश धवाला की भी सोशल मीडिया पर सक्रियता बनी हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उनके फेसबुक पेज पर करीब 8 हजार फॉलोअर हैं। धवाला ज्वालामुखी से कई बार विधायक रहे हैं और प्रदेश की राजनीति में मंत्री पद पर भी रह चुके हैं। 2022 में उन्होंने देहरा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था।
वहीं रजनीश धवाला के फेसबुक पेज पर करीब 7 हजार फॉलोअर बताए जा रहे हैं। भाजपा नेता रविंदर रवि की फेसबुक मौजूदगी में करीब 4 हजार फेसबुक फ्रेंड बताए जाते हैं।
इस बीच मुकेश कुमार की फेसबुक मौजूदगी भी ज्वालामुखी की डिजिटल राजनीति में अलग से दिखाई देती है। उनके पेज पर करीब 64 हजार फॉलोअर बताए जा रहे हैं, जबकि करीब 5 हजार लोग उन्हें फॉलो करते हैं। उनकी सोशल मीडिया पोस्ट में भाजपा और विशेष रूप से रमेश धवाला से जुड़ी राजनीतिक गतिविधियों के प्रति झुकाव दिखाई देता है। हालांकि सोशल मीडिया गतिविधियों के आधार पर किसी व्यक्ति की औपचारिक राजनीतिक संबद्धता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
क्या सोशल मीडिया बदल रहा है राजनीतिक संवाद?
ज्वालामुखी की राजनीति में सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव इस बात से भी समझा जा सकता है कि नेता अब विकास कार्यों, उद्घाटन समारोहों, जनसंपर्क कार्यक्रमों और राजनीतिक बयानों को तत्काल फेसबुक के जरिए लोगों तक पहुंचा रहे हैं।
खास तौर पर मौजूदा विधायक संजय रतन के सोशल मीडिया पेज पर विकास कार्यों और क्षेत्र से जुड़ी गतिविधियों की लगातार जानकारी साझा की जाती है। इससे उनके समर्थकों के साथ-साथ क्षेत्र से बाहर रहने वाले लोगों तक भी राजनीतिक गतिविधियों की पहुंच बनती है।
हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। फेसबुक फॉलोअर किसी नेता के डिजिटल प्रभाव का आंकड़ा हो सकता है, लेकिन इसे सीधे मतदाताओं के समर्थन के बराबर नहीं माना जा सकता। एक व्यक्ति कई राजनीतिक नेताओं को फॉलो कर सकता है और सोशल मीडिया पर सक्रियता तथा मतदान व्यवहार अलग-अलग हो सकते हैं।
कांग्रेस ने बताया विकास एजेंडे का असर
कांग्रेस प्रवक्ता ज्ञानेश्वर शर्मा का कहना है कि विधायक संजय रतन की लोकप्रियता उनके विकास एजेंडे के कारण लगातार बढ़ रही है। उनका कहना है कि क्षेत्र में विकास कार्यों को प्राथमिकता मिलने से लोगों में विधायक के प्रति सकारात्मक माहौल बना है।
कांग्रेस संगठन महासचिव नीरज शर्मा ने कहा कि संजय रतन का राजनीति में दबदबा पहले भी था, आज भी है और आगे भी कायम रहेगा।
कांग्रेस नेताओं के इन दावों को पार्टी का राजनीतिक आकलन माना जाना चाहिए। दूसरी ओर, सोशल मीडिया के उपलब्ध आंकड़े केवल डिजिटल पहुंच की तस्वीर पेश करते हैं; वे पूरे विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं की राय का प्रतिनिधि सर्वेक्षण नहीं हैं।
ज्वालामुखी में आगे और दिलचस्प होगी डिजिटल राजनीति
ज्वालामुखी विधानसभा क्षेत्र में अगले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां आगे बढ़ने के साथ सोशल मीडिया की भूमिका भी बढ़ने की संभावना है। फेसबुक के अलावा व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म अब नेताओं के लिए जनता तक पहुंचने के महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं।
फिलहाल फेसबुक के उपलब्ध आंकड़ों में संजय रतन की डिजिटल मौजूदगी अन्य स्थानीय राजनीतिक चेहरों की तुलना में काफी बड़ी दिखाई देती है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह डिजिटल सक्रियता केवल सोशल मीडिया तक सीमित रहती है या इसका असर जमीनी राजनीतिक गतिविधियों और जनसंपर्क पर भी दिखाई देता है।
ज्वालामुखी की राजनीति में फिलहाल मैदान के साथ-साथ मोबाइल स्क्रीन पर भी मुकाबला तेज होता दिखाई दे रहा है।