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धर्मशाला | नशा निवारण, जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी पर जोर, जोनल अस्पताल धर्मशाला में कार्यशाला आयोजित

Updated on Tuesday, September 15, 2026 21:00 PM IST

नशे से प्रभावित व्यक्ति को कलंक नहीं, सहयोग चाहिए: डॉ. उमेश भारती

15 सितंबर 2026 धर्मशाला। जिला स्वास्थ्य विभाग, कांगड़ा एवं गुंजन संस्था के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को जोनल अस्पताल धर्मशाला के सभागार में नशा निवारण, प्रारंभिक रोकथाम, जोखिम में कमी एवं सामुदायिक सहभागिता के साथ-साथसर्पदंश से बचाव एवं त्वरित उपचारपर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में कांगड़ा जिला के विभिन्न स्वास्थ्य ब्लॉकों से सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी, कांगड़ा डॉ. उमेश भारती मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर डॉ. राजेश सूद, डॉ. अनुराधा, अर्चना फुल्ल सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। विषय विशेषज्ञ विजय कुमार एवं पंकज पंडित ने रिसोर्स पर्सन के रूप में कार्यशाला का संचालन किया।

नशे की रोकथाम के लिए कारणों और जोखिम कारकों को समझना जरूरी

कार्यशाला के प्रमुख सत्र में विजय कुमार एवं पंकज पंडित ने प्रतिभागियों के साथ संवादात्मक चर्चा के माध्यम से नशे की समस्या के कारणों, जोखिम एवं सुरक्षात्मक कारकों, प्राथमिक रोकथाम, प्रारंभिक पहचान, जोखिम कम करने तथा उपचार एवं पुनर्वास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने बताया कि नशे की समस्या केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभावमानसिक स्वास्थ्य, परिवार, सामाजिक संबंधों, शिक्षा, रोजगार, आर्थिक स्थिति, अपराध एवं कानून-व्यवस्थातक पड़ता है। इसलिए नशा निवारण के लिए केवल नशे के आदी व्यक्ति के उपचार पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों एवं युवाओं में शुरुआत से रोकथाम, परिवारों की भूमिका, समुदाय की भागीदारी और समय रहते हस्तक्षेपपर समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।
रिसोर्स पर्सन ने स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि सामुदायिक स्तर पर स्वास्थ्य कर्मी नशे से संबंधित जोखिमों की पहचान, सही जानकारी देने, मिथकों को दूर करने, जरूरतमंद व्यक्ति को उचित उपचार एवं परामर्श सेवाओं से जोड़ने तथा परिवारों को सहयोग प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

नशे से प्रभावित व्यक्ति को कलंक नहीं, सहयोग चाहिए: डॉ. उमेश भारती

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. उमेश भारती ने नशे की समस्या से जुड़ेसामाजिक कलंक (Social Stigma)को एक गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि नशे से प्रभावित व्यक्ति के साथ-साथ उसका परिवार भी सामाजिक उपेक्षा और भेदभाव का सामना करता है। उन्होंने कहा किनशे की समस्या किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है और सही समय पर मार्गदर्शन, उपचार तथा परिवार और समाज के सहयोग से व्यक्ति इससे उबर सकता है।
उन्होंने स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे नशे से प्रभावित व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील एवं गैर-भेदभावपूर्ण दृष्टिकोण अपनाएं और उन्हें उपचार तथा पुनर्वास सेवाओं से जोड़ने में सहयोग करें।

डॉ. भारती ने बच्चों और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए पढ़ाई के साथखेल, संगीत, रचनात्मक गतिविधियों और सकारात्मक सामाजिक जुड़ावको बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
पीयर प्रेशर और जोखिमपूर्ण व्यवहार से बचाव जरूरी: डॉ. राजेश सूद
कार्यशाला के समापन सत्र में डॉ. राजेश सूद ने कहा कि नशा निवारण के लिए केवल जागरूकता संदेश देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि युवाओं के साथखुले संवाद, जीवन कौशल, निर्णय लेने की क्षमता और जोखिमपूर्ण व्यवहार से बचावपर काम करना जरूरी है।
उन्होंने युवाओं मेंपीयर प्रेशर (साथियों के दबाव)को एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक बताते हुए कहा कि बच्चों और युवाओं को 'ना' कहने, सही निर्णय लेने और दबाव की परिस्थितियों से सुरक्षित रूप से बाहर निकलने के लिए सक्षम बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि एचआईवी जैसे संवेदनशील विषयों पर खुले संवाद और जागरूकता से जिस प्रकार भय और भ्रांतियों को कम करने में मदद मिली, उसी प्रकारनशे जैसे संवेदनशील विषय पर भी परिवार, समुदाय और स्वास्थ्य तंत्र के बीच खुला एवं तथ्य आधारित संवादआवश्यक है।

सर्पदंश से बचाव एवं त्वरित उपचार पर भी दी जानकारी

कार्यशाला के दूसरे प्रमुख सत्र में सर्पदंश बचाव कार्यक्रम विशेषज्ञअर्चना फुल्ल ने सर्पदंश से बचाव, जोखिम कम करने तथा सर्पदंश की स्थिति में अपनाए जाने वाले आवश्यक एवं व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी।

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