कृषि विश्वविद्यालय ने 80 अनुसूचित जाति किसानों के लिए जैविक खेती पर दो प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए
वैज्ञानिक तरीके से जैविक खेती को बढ़ावा देने और अनुसूचित जाति कृषक समुदाय को सशक्त बनाने पर जोर
पालमपुर, 11 सितंबर, 2026: चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर के जैविक कृषि एवं प्राकृतिक खेती विभाग द्वारा हिमाचल प्रदेश के अनुसूचित जाति के किसानों के लिए 9 से 10 सितंबर, 2026 तक जैविक खेती पर दो एक-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में कांगड़ा जिले की ग्राम पंचायत भुआणा, तरेहल एवं फरेड़ के अंतर्गत आने वाले अम्बोटू, घरलून, कचेहरा, घेड, भाम्बर, धंधेरा, मकोल, कांगड़ी, मकरोटी, कैलाशपुर, नगता एवं फरेड़ गांवों के कुल 80 अनुसूचित जाति किसानों ने भाग लिया।
हिमाचल प्रदेश सरकार की राष्ट्रीय कृषि विकास योजना द्वारा प्रायोजित इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य अनुसूचित जाति कृषक समुदाय को सशक्त बनाना तथा जैविक खेती को वैज्ञानिक, टिकाऊ एवं लाभकारी कृषि पद्धति के रूप में बढ़ावा देना था।
प्रशिक्षण कार्यक्रमों की अध्यक्षता डॉ. जनार्दन सिंह, निदेशक प्रसार शिक्षा, चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय ने की। किसानों को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने फसल विविधीकरण अपनाने तथा मृदा स्वास्थ्य में सुधार के लिए विभिन्न फसलों के साथ मौसमी दलहनी फसलों को अंतरवर्तीय फसल के रूप में उगाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों, खरपतवारनाशकों तथा अन्य कृषि रसायनों के असंतुलित एवं अनियंत्रित उपयोग के दुष्प्रभावों के प्रति किसानों को सचेत किया। उन्होंने मृदा के भौतिक, रासायनिक एवं सूक्ष्मजीवी गुणों को बनाए रखने तथा पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उत्पादन में जैविक खेती के महत्व पर बल दिया। उन्होंने किसानों को प्रशिक्षण के दौरान सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक दोनों पहलुओं को सीखकर जैविक खेती को लाभकारी उद्यम के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
प्रशिक्षण के दौरान जैविक खेती के विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञ व्याख्यान एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित किए गए। प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रामेश्वर, डॉ. गोपाल कतना एवं डॉ. राकेश ने जैविक खेती के सिद्धांत एवं उन्नत तकनीकों, बीज उत्पादन तथा कीट-व्याधि प्रबंधन सहित विभिन्न विषयों पर किसानों को जानकारी प्रदान की।
किसानों को विश्वविद्यालय के जैविक कृषि फार्म का भ्रमण भी करवाया गया, जहां विशेषज्ञों ने विभिन्न प्रकार की कम्पोस्ट एवं जैव-निर्माणों की तैयारी, जैव उर्वरकों तथा जैव-एजेंट्स के उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। जैविक खेती में कीट प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए किसानों को कृषि उपकरण भी वितरित किए गए।
इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को जैविक खेती से संबंधित वैज्ञानिक जानकारी एवं व्यावहारिक कौशल प्रदान किए गए, जिससे क्षेत्र में जैविक खेती को टिकाऊ रूप से अपनाने तथा किसानों की उत्पादकता एवं आय में वृद्धि को बढ़ावा दिया जा सके।