7 सितंबर 2026, सोमवार को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी है। इस दिन अजा एकादशी व्रत रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि शाम लगभग 5:04 बजे तक रहेगी, इसके बाद द्वादशी शुरू होगी। पुनर्वसु नक्षत्र शाम करीब 6:14 बजे तक रहेगा, फिर पुष्य नक्षत्र प्रारंभ होगा।
दिन: सोमवार
तिथि: भाद्रपद कृष्ण पक्ष एकादशी
विक्रम संवत: 2083, सिद्धार्थी
शक संवत: 1948, पराभव
पक्ष: कृष्ण पक्ष
मास: भाद्रपद
व्रत: अजा एकादशी
चंद्र राशि: मिथुन
सूर्य राशि: सिंह
नक्षत्र: पुनर्वसु, शाम 6:14 बजे तक, इसके बाद पुष्य
योग: व्यतीपात, सुबह 6:41 बजे तक, इसके बाद वैरीयान
करण: बव, सुबह 6:16 बजे तक; इसके बाद बालव
एकादशी तिथि समाप्त: शाम 5:03 बजे के आसपास।
🌅 सूर्योदय-सूर्यास्त
स्थान के अनुसार समय में कुछ मिनट का अंतर रहेगा। उत्तर भारत के लिए सूर्योदय लगभग 6 बजे और सूर्यास्त लगभग 6:30 बजे के आसपास रहेगा।
🕉️ शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: लगभग 4:30–5:20 बजे
अभिजीत मुहूर्त: लगभग 11:50 बजे–12:40 बजे
विजय मुहूर्त: लगभग 2:20–3:10 बजे
अमृत काल: लगभग 4:00–5:30 बजे
सर्वार्थ सिद्धि योग: शाम 6:14 बजे से अगले दिन सुबह तक।
🚫 राहुकाल
सोमवार को राहुकाल लगभग सुबह 7:40 से 9:15 बजे के बीच रहेगा। स्थान के अनुसार इसमें थोड़ा अंतर हो सकता है।
🌺 अजा एकादशी विशेष
7 सितंबर 2026 को अजा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। एकादशी तिथि 6 सितंबर की शाम से शुरू होकर 7 सितंबर की शाम लगभग 5:03 बजे समाप्त होगी। इसके बाद द्वादशी तिथि प्रारंभ होगी।
अजा एकादशी का महत्व:
सनातन परंपरा में अजा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखकर भगवान विष्णु की पूजा, विष्णु सहस्रनाम का पाठ, मंत्र-जप और दान-पुण्य करते हैं। माना जाता है कि श्रद्धा से किया गया व्रत मनुष्य को आध्यात्मिक शांति और पुण्य प्रदान करता है।
पारण: एकादशी व्रत का पारण 8 सितंबर 2026, मंगलवार को द्वादशी तिथि में किया जाएगा। पारण का सटीक समय स्थान के अनुसार निर्धारित किया जाना चाहिए।
नोट: पंचांग के मुहूर्त और सूर्योदय-सूर्यास्त स्थान के अनुसार बदलते हैं। इसलिए ज्वालामुखी/कांगड़ा के लिए प्रकाशित करने से पहले स्थानीय समय के अनुसार अंतिम मिनटों का मिलान करना बेहतर रहेगा।