# आंखों की देखभाल, सर्पदंश, कैंसर उपचार और HPV टीकाकरण को लेकर जागरूकता कार्यशाला
**धर्मशाला, 1 सितंबर:** 41वें राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़े के तहत जोनल अस्पताल धर्मशाला के कॉन्फ्रेंस हॉल में आंखों की देखभाल, नेत्रदान, सर्पदंश से बचाव, कैंसर फॉलोअप उपचार तथा एचपीवी टीकाकरण को लेकर जिला स्तरीय जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. ओमेश भारती ने की।
कार्यशाला में वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनुराधा शर्मा, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.के. सूद, जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अनुराधा, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. दुष्यंत कुमार सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
डॉ. ओमेश भारती ने कहा कि लोगों को आंखों की नियमित जांच और नेत्रदान के महत्व के प्रति जागरूक करना कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने अपील की, **“अपनी आंखों की देखभाल करें और नेत्रदान का संकल्प लें, ताकि किसी के जीवन में रोशनी लाई जा सके।”**
जोनल अस्पताल के नेत्र विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र मिन्हास ने आंखों की सुरक्षा के उपाय बताए। उन्होंने 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों तथा मधुमेह रोगियों को नियमित आंखों की जांच करवाने की सलाह दी। मोबाइल, कंप्यूटर और टीवी का इस्तेमाल करते समय 20-20-20 नियम अपनाने, संतुलित आहार लेने, धूप व धूल से आंखों की रक्षा करने तथा चिकित्सकीय सलाह के बिना आई ड्रॉप का प्रयोग न करने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि मृत्यु के बाद छह से आठ घंटे के भीतर कॉर्निया दान किया जा सकता है और इससे कॉर्नियल ब्लाइंडनेस से पीड़ित लोगों को दृष्टि मिल सकती है। इस अवसर पर प्रतिभागियों को नेत्रदान की शपथ भी दिलाई गई।
### जोनल अस्पताल में कैंसर फॉलोअप की सुविधा
डॉ. भारती ने बताया कि जोनल अस्पताल धर्मशाला और सिविल अस्पताल नूरपुर में डे-केयर कैंसर सेंटर की सुविधा उपलब्ध है। टांडा मेडिकल कॉलेज में उपचार ले रहे मरीज इन केंद्रों में फॉलोअप उपचार जारी रख सकते हैं। वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनुराधा शर्मा ने कहा कि मरीजों को दवाइयां लेने और आवश्यक परामर्श के लिए उनके कार्यालय कमरा नंबर 208 में संपर्क करने की सुविधा मिलेगी।
### सर्पदंश पर जागरूकता
सर्पदंश को लेकर SARPA प्रोजेक्ट की आर्चना फूल ने प्रतिभागियों को जागरूक किया। उन्होंने कहा कि सर्पदंश की स्थिति में पीड़ित को तुरंत अस्पताल पहुंचाना चाहिए। प्रभावित अंग को स्थिर रखें, मरीज को शांत रखें और हाथ-पैर में पहने अंगूठी, चूड़ी या अन्य कसने वाली वस्तुएं हटा दें। मरीज को चलने न दें और आपात स्थिति में 108 एंबुलेंस की सहायता लें।
उन्होंने स्पष्ट किया कि घाव को काटना, चूसना, टॉर्निकेट बांधना अथवा घरेलू उपचार करना नुकसानदायक हो सकता है। झाड़-फूंक या उपचार के नाम पर समय गंवाने के बजाय पीड़ित को तत्काल अस्पताल ले जाना चाहिए। विषैले सर्पदंश में एंटी-स्नेक वेनम (ASV) प्रभावी उपचार है।
### HPV टीकाकरण को लेकर अपील
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. दुष्यंत कुमार ने सर्वाइकल कैंसर से बचाव में HPV वैक्सीन की भूमिका की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि **14 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी और 15 वर्ष से कम आयु की लड़कियों** को यह टीका सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। डॉ. भारती ने अभिभावकों और समुदाय से टीकाकरण के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने की अपील की।
कार्यशाला में रोटरी क्लब, इनरव्हील और जागोरी संस्था के सदस्यों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने स्वास्थ्य संबंधी संदेशों को गांव और समुदाय स्तर तक पहुंचाने का संकल्प लिया।