2 सितंबर 2026 का पंचांग
भारतीय ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का अपना महत्व है। पंचांग के अनुसार ही हम अपने धार्मिक क्रियाकलाप करते हैं। शुभ अशुभ का ज्ञान हमें प्राप्त होता है। आइये जानते हैं, आज के पंचांग के अनुसार कब है शुभ मुहूर्त और कब तक है राहुकाल और क्या है ग्रह चाल। 2 सितंबर 2026, बुधवार** को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि रहेगी और इसके बाद षष्ठी तिथि का आरंभ होगा। धार्मिक दृष्टि से यह दिन व्रत, पूजा-पाठ और भगवान शिव की आराधना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। जानिए आज के पंचांग में तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहुकाल, शुभ मुहूर्त, सूर्योदय-सूर्यास्त और चंद्र राशि से जुड़ी पूरी जानकारी।
हिन्दू पंचांग के अनुसार आज भाद्रपद, कृष्ण, पंचमी, बुधवार है। सूर्य दक्षिणायन, उत्तर गोल, वर्षा ऋतु। शक संवत 1948 , विक्रमी संवत 2083, 2 सितंबर 2026, राहुकाल दोपहर 12 बजकर 00 मिनट से 01 बजकर 30 मिनट तक। पंचमी तिथि प्रातः 06 बजकर 12 मिनट तक उपरांत षष्ठी तिथि का आरंभ
आज का पंचांग एक नजर में
**दिन:** बुधवार
**तारीख:** 2 सितंबर 2026
**मास:** भाद्रपद
**पक्ष:** कृष्ण पक्ष
**तिथि:** पंचमी, इसके बाद षष्ठी
**नक्षत्र:** भरणी
**चंद्र राशि:** मेष
**सूर्य राशि:** सिंह
**ऋतु:** शरद
**अयन:** दक्षिणायन
आज का नक्षत्र और योग
आज **भरणी नक्षत्र** का प्रभाव रहेगा। भरणी नक्षत्र को दृढ़ता, जिम्मेदारी और निर्णय क्षमता से जोड़ा जाता है। दिन में बनने वाले योग और करण के अनुसार धार्मिक एवं दैनिक कार्यों की योजना बनाई जा सकती है।
चंद्रमा की स्थिति
आज चंद्रमा **मेष राशि** में रहेगा। चंद्र राशि के आधार पर मनोभाव, निर्णय क्षमता और दैनिक गतिविधियों पर ज्योतिषीय प्रभाव माना जाता है।
सूर्योदय और सूर्यास्त
सूर्योदय का समय: प्रातः 05:59 बजे
सूर्यास्त का समय: सायं 06:42 बजे
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त - सुबह में 03 बजकर 55 मिनट से सुबह 04 बजकर 41 मिनट तक ।
अभिजीत मुहूर्त -
अमृत काल - रात्रि 09 बजकर 06 मिनट से रात्रि 10 बजकर 38 मिनट तक ।
अशुभ मुहूर्त
राहुकाल - दोपहर 12 बजकर 00 मिनट से 01 बजकर 30 मिनट तक रहेगा।
गुलिक काल- सुबह 10 बजकर 30 मिनट से दोपहर 12 बजकर 00 मिनट तक रहेगा।
यमगंड - सुबह 07 बजकर 30 मिनट से 09 बजकर 00 मिनट तक रहेगा।
## आज क्या करें?
सुबह स्नान के बाद भगवान की पूजा करें। अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करें और जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करें। घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने के लिए धार्मिक पाठ या मंत्र जाप भी किया जा सकता है।
पंचांग के तिथि, नक्षत्र, सूर्योदय, सूर्यास्त और मुहूर्त के समय स्थान के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है।
कोई भी शुभ समय या मुहूर्त के दौरान, राहुकाल गुलिक काल, यमगण्ड काल से बचना चाहिए क्योंकि ये समय अशुभ माना जाता है। अपने दैनिक पंचांग को रोजाना देखें और किसी भी नए काम को शुरू करने के लिए इसका पालन करें जैसे कि वैवाहिक समारोह, सामाजिक मामलों, महत्वपूर्ण कार्यक्रमों, उद्घाटन, नए व्यापार उपक्रम आदि जैसे शुभ कार्यक्रम इसके अनुसार करें।