ज्वालामुखी, 11 अगस्त। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पावन श्रावण पुत्रदा एकादशी के अवसर पर रविवार, 23 अगस्त 2026 को भव्य धार्मिक आयोजन एवं कीर्तन का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर श्रद्धालु भगवान श्रीहरि विष्णु एवं माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना कर सुख-शांति, समृद्धि और परिवार की मंगलकामना करेंगे।
श्रावण पुत्रदा एकादशी सनातन धर्म में विशेष महत्व रखने वाली एकादशी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने, भगवान विष्णु की आराधना करने और श्रद्धा के साथ भजन-कीर्तन करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। संतान सुख, परिवार की खुशहाली और संतान के उज्ज्वल भविष्य की कामना से भी श्रद्धालु इस एकादशी का व्रत रखते हैं।
23 अगस्त को रखा जाएगा एकादशी व्रत
वर्ष 2026 में श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत रविवार, 23 अगस्त को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि का प्रारंभ 23 अगस्त 2026 को सुबह 2:00 बजे होगा और एकादशी तिथि 24 अगस्त 2026 को सुबह 4:18 बजे समाप्त होगी।
व्रत का पारण 24 अगस्त 2026 को सुबह 7:19 बजे से 9:43 बजे के बीच किया जाएगा।
एकादशी तिथि और पारण का समय
श्रावण पुत्रदा एकादशी: रविवार, 23 अगस्त 2026
पक्ष: श्रावण शुक्ल पक्ष
एकादशी तिथि प्रारंभ: 23 अगस्त, सुबह 2:00 बजे
एकादशी तिथि समाप्त: 24 अगस्त, सुबह 4:18 बजे
व्रत पारण: 24 अगस्त, सुबह 7:19 बजे से 9:43 बजे के बीच
भव्य कीर्तन में गूंजेगा भगवान विष्णु का गुणगान
श्रावण पुत्रदा एकादशी के पावन अवसर पर आयोजित भव्य कीर्तन में भगवान श्रीहरि विष्णु के भजनों का गुणगान किया जाएगा। धार्मिक वातावरण में श्रद्धालु भक्ति गीतों और कीर्तन के माध्यम से भगवान विष्णु की आराधना करेंगे।
आयोजकों ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में धार्मिक आयोजन में शामिल होकर भगवान श्रीहरि का आशीर्वाद प्राप्त करने का आह्वान किया है। आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं के लिए पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का विशेष प्रबंध किया जाएगा।
भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व
एकादशी के दिन प्रातः स्नान के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा है। भगवान को पीले पुष्प, चंदन, फल और तुलसी दल अर्पित किए जाते हैं। श्रद्धालु भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करने के साथ विष्णु सहस्रनाम, धार्मिक ग्रंथों का पाठ और भजन-कीर्तन करते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार एकादशी के दिन दान-पुण्य, जरूरतमंदों की सहायता और सेवा कार्य करना भी शुभ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र और अन्य आवश्यक सामग्री का दान कर सकते हैं।
संतान सुख की कामना के लिए रखा जाता है व्रत
'पुत्रदा एकादशी' का विशेष संबंध संतान सुख और संतान की मंगलकामना से माना जाता है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक इस व्रत का पालन करने और भगवान विष्णु की आराधना करने से संतान संबंधी मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हालांकि धार्मिक मान्यताएं आस्था पर आधारित हैं और इन्हें उसी भाव से देखा जाना चाहिए।
श्रावण मास में आने वाली इस पावन एकादशी के अवसर पर श्रद्धालु व्रत, पूजा, जप, भजन-कीर्तन और दान-पुण्य के माध्यम से भगवान श्रीहरि विष्णु की भक्ति करेंगे। धार्मिक आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है।